धार्मिक

ये घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग भगवान शिव का एक स्वयंभू ज्योतिर्लिंग है जो भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है. इस ज्योतिर्लिंग के बारे में मान्यता है कि संतान की कामना कर रहे जोड़ों के लिए यह वरदान से कम नहीं है. यहां निसंतानों को भोलेनाथ संतान का आशीर्वाद देते हैं.

हमारे जीवन में कुछ चीजें बहुत ही जरूरी होती है उन्हीं में से एक है नींद, अगर इंसान की नींद पूरी ना हो तो उसका पूरा दिन अच्छा नहीं जाता यानी उसके जीवन पर नींद का गहरा प्रभाव होता है. वास्तु के अनुसार भी सोते वक्त के कुछ नियम बताए गए हैं जिसे पालन करने से हमारे जीवन में सकारात्मकता आती है.

भगवान शिव की भक्ति और पूजा को बेलपत्र के बिना अधूरा ही माना जाता है. देवों के देव महादेव को प्रसन्न करने के लिए उन पर चढ़ाए जाने वाली सामग्री में बेलपत्र का सर्वश्रेष्ठ स्थान है. मान्यता है की सावन में इसे शिव पर अर्पित करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है

हिंदू धर्म में सावन को भगवान शिव का प्रिय महीना माना जाता है. इस माह में मात्र शिवलिंग पर जल चढ़ाने से शिव अत्यंत शीघ्र कृपा प्राप्त होती है यानी इस महीने में भोलेनाथ बहुत जल्दी प्रसन्न हो जाते हैं. वास्तु शास्त्र के मुताबिक, घर में रखी कुछ नकारात्मक चीजें धन हानि, गृह क्लेश और रोगों का कारण बनती हैं.

देवशयनी एकादशी, हिंदू धर्म में खासतौर पर वैष्णव संप्रदाय के लिए बहुत ही शुभ दिन है. यह अत्यंत पवित्र एकादशी आषाढ़ माह में शुक्ल पक्ष की एकादशी पर पड़ती है. इसे आषाढ़ी एकादशी, महा एकादशी, पद्मा एकादशी, सर्वपापहारी एकादशी और हरिशयनी एकादशी भी कहा जाता है.

चातुर्मास की शुरुआत भी सावन से ही होती है और सावन शिव का प्रिय महीना है. इस माह में शिव ने हलाहल विष को पिया था. आप भी अपने दोषों को दूर करने के लिए इन चार माह में शिव की भक्ति और आराधना कर सकते हैं.

   हिन्दू धर्म में दर्श अमावस्या पितरों को समर्पित एक अत्यंत महत्वपूर्ण तिथि है. इस दिन रात के समय किए गए कुछ विशेष उपाय आपके बिगड़े कामों को बनाने और जीवन में सुख-समृद्धि लाने में बहुत प्रभावी माने जाते हैं.

हिंदू धर्म में पूजा के समय पति-पत्नी का एक साथ बैठना केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि एक गहरा आध्यात्मिक और सामाजिक महत्व है, जो पूर्ण रूप से दांपत्य सुख का प्रतीक है. विवाह को केवल दो व्यक्तियों का मिलन नहीं, बल्कि दो आत्माओं का पवित्र बंधन माना जाता है.

हमारे जीवन में गुरु ग्रह का बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान है. कुंडली में इनकी शुभ स्थिति और मजबूती आपके जीवन को संवार देती है, वहीं कुंडली में बृहस्पति ग्रह का बिगड़ा होना आपके जीवन में विभिन्न तरह की परेशानियों को जन्म देता है. ये दोनों ही देवता हमारे जीवन में महत्वपूर्ण है इनकी कृपा ना होने पर दुख और दरिद्रता को झेलना पड़ता है.

आषाढ़ मास का पहला प्रदोष व्रत सोमवार के दिन पड़ रहा है. सोमवार को पड़ने के कारण इसे सोम प्रदोष व्रत कहा जा रहा है. सोम प्रदोष व्रत भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित होता है. ऐसी मान्यता है कि इस दिन प्रदोष काल (सूर्यास्त के बाद का समय) में भगवान शिव और माता पार्वती कैलाश पर्वत पर प्रसन्न मुद्रा में नृत्य करते हैं और अपने भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं.