पंचकूला: हरियाणा के पंचकूला शहर के सेक्टर-20 स्थित एक सरकारी स्कूल में के.जी. कक्षा की एक मासूम बच्ची के साथ मारपीट की घटना से जुड़े मामले में बुधवार को अदालत और विधिक स्तर पर दो बेहद अहम फैसले सामने आए हैं। जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड (JJB) ने सुनवाई के दौरान इस प्रकरण में संलिप्त 8 वर्षीय आरोपी बच्चे को विधिवत जमानत प्रदान कर दी है। इसके साथ ही, बोर्ड ने सोशल मीडिया और अन्य सार्वजनिक डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर वायरल हो रहे इस घटना से संबंधित तमाम वीडियो, तस्वीरों और आरोपी की पहचान को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से उजागर करने वाली सभी सामग्रियों को तत्काल प्रभाव से हटाने के लिए आगामी 27 नवंबर तक के कड़े निर्देश भी जारी किए हैं।
आरोपी बच्चे के पिता द्वारा जेजे अधिनियम की धारा 74 के तहत दायर की गई थी याचिका, पहचान उजागर करने वाली सामग्री हटाने की उठी थी मांग
प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस पूरे मामले में आरोपी बच्चे के पिता की ओर से जुवेनाइल जस्टिस (केयर एंड प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन) एक्ट, 2015 की धारा 74 के अंतर्गत एक विशेष आवेदन प्रस्तुत किया गया था। इस आवेदन में यह पुरजोर मांग की गई थी कि इंटरनेट, सोशल मीडिया और अन्य सार्वजनिक मंचों पर इस घटना से जुड़े जो वीडियो और फोटो प्रसारित हो रहे हैं, उनसे नाबालिग बच्चे की पहचान उजागर हो रही है, जिस पर कानूनी रोक लगनी चाहिए। बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं के अनुसार, बोर्ड ने इस तर्कसंगत आवेदन को स्वीकार करते हुए संबंधित जांच अधिकारी को यह कड़े निर्देश दिए हैं कि वे इंटरनेट से सभी आपत्तिजनक वीडियो, तस्वीरें और पहचान उजागर करने वाली सामग्री को हटवाएं। साथ ही, जांच अधिकारी को आगामी 27 नवंबर तक इस आदेश के अनुपालन की पूरी रिपोर्ट बोर्ड के समक्ष प्रस्तुत करनी होगी। इस याचिका में स्कूल की प्रधानाचार्य और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को भी यह पाबंद करने की मांग की गई थी कि वे इस प्रकरण से जुड़ी किसी भी सामग्री को आगे साझा या प्रकाशित न होने दें।
बचाव पक्ष की दलीलें सुनने के बाद बोर्ड ने मंजूर की जमानत, माता-पिता ने बच्चे की काउंसलिंग और व्यवहार सुधार का दिया पूरा भरोसा
बुधवार को निर्धारित सुनवाई के दौरान आरोपी बच्चे के परिजनों की ओर से उसकी जमानत के लिए औपचारिक याचिका भी दायर की गई थी। अदालत में बचाव पक्ष के वकीलों ने अपनी दलील रखते हुए कहा कि बच्चे का पहले से कोई भी आपराधिक रिकॉर्ड नहीं रहा है और यदि उसे लंबे समय तक ऑब्जर्वेशन होम (बाल सुधार गृह) में रखा गया, तो उसकी स्कूली शिक्षा के साथ-साथ उसके मानसिक और मनोवैज्ञानिक विकास पर भी बहुत बुरा असर पड़ सकता है। सुनवाई के दौरान बच्चे के माता-पिता ने अदालत को आश्वस्त किया कि वे अपने बच्चे की नियमित काउंसलिंग करवाएंगे, उसके आचरण और व्यवहार में सुधार लाने के लिए हरसंभव प्रयास करेंगे और उसके समुचित पुनर्वास को पूरी तरह सुनिश्चित करेंगे। दोनों पक्षों की दलीलों पर गंभीरता से विचार करने के पश्चात जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने आरोपी बच्चे को जमानत देने का ऐतिहासिक निर्णय सुनाया।


