महाराष्ट्र: राज्य के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) कमिश्नर तुकाराम मुंढे द्वारा पदभार संभालने के बाद शुरू किए गए आक्रामक जांच अभियान पर अब बॉम्बे हाईकोर्ट ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन (MCA) के पांच आउटलेट्स के लाइसेंस निलंबन के मामले में सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा, “अधिकारी न तो हमारा आदेश समझते हैं और न ही एक्ट। वे अपने नियम तक नहीं पढ़ते, न ही कानून जानते हैं, बस कार्रवाई कर देते हैं।”

अदालत ने नई रिपोर्ट के आधार पर एमसीए के पांचों रेस्टोरेंट को तत्काल प्रभाव से पुनः खोलने की अनुमति दे दी है। पिछले एक महीने में बॉम्बे हाईकोर्ट की मुंबई, नागपुर और औरंगाबाद बेंचों ने कम से कम 11 मामलों में FDA की लाइसेंस निलंबन कार्रवाई पर रोक लगाई है या उसे पूरी तरह पलट दिया है।

📊 2 महीने में 3,137 जांच और 165 लाइसेंस सस्पेंड: ताबड़तोड़ कार्रवाई का ब्योरा

तुकाराम मुंढे के कार्यकाल में हुई प्रमुख कार्रवाइयां:

  • सघन निरीक्षण अभियान: 25 मई से 31 जुलाई के बीच FDA ने कुल 3,137 खाद्य प्रतिष्ठानों की जांच की।

  • नोटिस व निलंबन: इस दौरान 764 सुधार नोटिस (Improvement Notices) जारी किए गए और 165 लाइसेंस निलंबित किए गए।

  • करोड़ों का स्टॉक जब्त: विभाग ने करीब ₹55.72 करोड़ मूल्य का 28.6 लाख किलोग्राम खाद्य स्टॉक जब्त किया।

  • होटल-ढाबों पर एक्शन: इनमें से होटल, रेस्तरां और ढाबों के 890 प्रतिष्ठानों की जांच कर 116 लाइसेंस सस्पेंड किए गए थे।

⚖️ अदालतों ने इन प्रमुख मामलों में FDA के आदेशों को ठहराया अनुचित

अदालती आदेशों और प्रमुख मामलों का विश्लेषण:

  • 1. पुणे की गुरुनानक डेयरी (98% अनुपालन, फिर भी 34 दिन बंद): दोबारा जांच में दुकान ने 36 में से 35 मानक (98%) पूरे कर लिए थे, फिर भी निलंबन जारी रहा। हाईकोर्ट ने कार्रवाई को गैर-जरूरी मानते हुए FDA को ₹5 लाख मुआवजा देने का आदेश दिया।

  • 2. नवी मुंबई का पवन बार एवं सिप्ला फार्मा: पवन बार ने 63% से 100% अनुपालन हासिल कर लिया था, फिर भी निलंबन नहीं हटाया गया, जिसे कोर्ट ने रद्द किया। वहीं सिप्ला फार्मा की पुणे यूनिट का लाइसेंस रद्द करने का आदेश भी कोर्ट की फटकार के बाद FDA को वापस लेना पड़ा।

  • 3. नवी मुंबई का फाइव स्टार होटल: निरीक्षण के अगले दिन ही लाइसेंस सस्पेंड करने पर कोर्ट ने कहा कि व्यापारियों को सुधार और पक्ष रखने का उचित अवसर दिया जाना चाहिए। कोर्ट ने उदाहरण दिया कि अचानक अस्पताल का लाइसेंस रद्द करने से मरीजों के जीवन पर संकट आ सकता है।

  • 4. औरंगाबाद व नागपुर बेंच की राहत: औरंगाबाद बेंच ने दूध विक्रेताओं के निलंबन पर अंतरिम रोक लगाई। नागपुर बेंच ने वर्धा की 80 साल पुरानी डेयरी को राहत देते हुए कहा कि केवल एक उत्पाद में जोखिम के चलते पूरे प्रतिष्ठान को बंद करना उचित नहीं है।

  • 5. मुंबई का पूर्णिमा रेस्तरां: कोर्ट द्वारा निजी बनाम सरकारी प्रतिष्ठानों में भेदभाव पर टिप्पणी के बाद FDA को हाईकोर्ट परिसर की कैंटीनों की भी जांच करनी पड़ी।

📜 फूड सेफ्टी एक्ट की धारा 32 और तुकाराम मुंढे का पक्ष

कानूनी प्रावधान और विवाद की मुख्य जड़:

  • धारा 32 की कानूनी प्रक्रिया: फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट (FSSAI Act) की धारा 32 के तहत सामान्य खामियों पर पहले सुधार नोटिस देना अनिवार्य है। तत्काल लाइसेंस निलंबन केवल असाधारण आपातकालीन परिस्थितियों में ही किया जा सकता है, जहां जनस्वास्थ्य को सीधा खतरा हो और कारण लिखित रूप से दर्ज हों।

  • कमिश्नर तुकाराम मुंढे का तर्क: FDA का कहना है कि औचक छापों में अत्यधिक गंदगी, असुरक्षित भोजन और स्वच्छता की भारी अनदेखी पाई गई थी। मुंढे ने कहा कि लाइसेंस केवल गंभीर स्वास्थ्य जोखिम की स्थिति में ही निलंबित किए गए और विभाग बिना किसी पक्षपात के सभी पर समान नियम लागू कर रहा है।

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