बिजयानंद पटनायक को बीजू पटनायक के नाम से जाना जाता है। इनका जन्म 5 मार्च 1916 में कटक,उड़ीसा में हुआ| बीजू पटनायक जी राजनेता, सामाजिक कार्यकर्ता, ओडिशा के पूर्व मुख्य मंत्री थे| एक राजनेता के अलावा वह एक एयरनोटिकल इंजीनियर, नेविगेटर, उद्योगपति, स्वतंत्रता सेनानी व पायलट थे। इन सबसे ऊपर उन्हें एक अभूतपूर्व व्यक्तित्व के तौर पर जाना जाता है। नेपोलियन उनके प्रेरणा थे, और बीजू ने उन्हीं के पदचिन्हों का अनुसरण किया। बीजू पटनायक लोगों को प्रोत्साहित करने और विश्वास जीतने में दक्ष थे।
वह लोगों के साथ प्रभावशाली ढंग से बात करते थे और अपने विचार जनता तक सही ढंग से पहुंचाने में समर्थ थे। अपनी दृढ़ इच्छा और त्याग के चलते वह एक प्रसिद्ध राजनेता और सामाजिक कार्यकर्ता बने। उड़ीसा की जनता के लिए उन्होंने कहा था, कि ‘‘ 21वीं सदी के राज्य का मेरा सपना था, मेरे पास ऐसे पुरुष व महिलाएं हों जिनकी नजर में व्यक्तिगत हित से पहले राज्य का हित आता हो। उन्हें खुद पर गर्व होगा और वे स्वयं में आत्मविश्वास महसूस करेंगे। वे खुद को छोड़कर किसी की दया पर निर्भर नहीं रहेंगे। अपने बुद्धिमता और क्षमता के द्वारा वह कलिंग पर दोबारा अधिकार प्राप्त कर लेंगे।

प्रारंभिक जीवन
बीजू पटनायक के पिता का नाम स्वर्गीय लक्समीनारायण पटनायक और माँ का नाम आशालता देवी था|उनके पिता उडि़या आंदोलन के अग्रणी सदस्य और जाने-माने राष्ट्रवादी थे। उनके दो भाई और एक बहन थी। उन्होंने अपनी प्राथमिक शिक्षा मिशन प्राइमरी स्कूल और मिशन क्राइस्ट कॉलेजिएट कटक से पूरी की। 1927 में वह रेवेनशॉ विद्यालय चले गए, जहां एक समय पर नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने भी अध्ययन किया था।
इसे भी पढ़ें : Single Use Plastic ; है पर्यावरण के लिए सबसे बड़ा खतरा ,जानिए क्यों………..
वह अपने कॉलेज के दिनों में प्रतिभावान खिलाड़ी थे और यूनिवर्सिटी की फुटबॉल, हॉकी और एथलेटिक्स टीम का नेतृत्व करते थे। वह तीन साल तक लगातार स्पोर्ट्स चैंपियन रहे। दिल्ली फ्लाइंग क्लब और एयरनोटिक ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया में पायलट का प्रशिक्षण लेने के लिए उन्होंने बीच में ही पढ़ाई छोड़ दी। उन्हें बचपन से ही हवाई जहाज उड़ाने का बहुत शौक था| और इसी तरह वह एक प्रिसिद्ध पायलेट और नेविगेटर बन गए|
करियर
बीजू पटनायक महात्मा गाँधी से बहुत प्रभावित थे।उन्होंने भारत छोड़ो आंदोलन में भाग लिया और 1943 में दो साल के लिए जेल की सजा भी काटी। उन पर स्वतंत्रता सेनानियों को अपने प्लेन में गुप्त स्थान तक पहुंचाने का आरोप था।उन्होंने इंडोनेशिया के स्वतंत्रता आंदोलन में भी अहम भूमिका निभाई।23 मार्च 1947 को पंडित नेहरू ने 22 एशियाई देशों की पहली इंटर एशिया कांफ्रेंस में भाग लेने के लिए बीजू पटनायक को भी आमंत्रित किया। इसके बाद इंडोनेशिया के लोगों में उनकी छवि एक नायक की बन गई।

वर्ष 1946 में बीजू उत्तर कटक विधानसभा क्षेत्र से निर्वाचित होकर विधानसभा पहुंचे|1961 से 1963 तक उन्होंने उड़ीसा के मुख्यमंत्री के तौर पर काम किया। वह लोकसभा और राज्यसभा के सदस्य भी रहे। 1975 में जब देश में आपातकाल था, तब अन्य विपक्षी नेताओं के साथ गिरफ्तार होने वाले वह पहले व्यक्ति थे।
इसे भी पढ़ें : Leap Year 2020 विशेष इतिहास: सबसे पहला कैलेंडर
1977 में वह जेल से छूटे और केंद्रपारा से लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए तथा 1979 तक मोरारजी देसाई और चौधरी चरण सिंह की सरकार में केंद्रीय लोहा इस्पात व खनन मंत्री रहे। 1980 में बीजू लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए और 1986 में वह दोबारा लोकसभा का चुनाव जीत गए। 1990 के विधानसभा चुनाव में जनता दल की जीत हुई और दोबारा वह उड़ीसा के मुख्यमंत्री बने। उन्होंने 1995 तक मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए उड़ीसा की सेवा की।
बीजू पटनायक के पुरुस्कार और सम्मान
इंडोनेशिया की सरकार ने उन्हें सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘‘ भूमिपुत्र‘‘ से नवाजा। यह पुरस्कार उनकी वीरता और साहसिक कार्यों के चलते दिया गया। 1996 में इंडोनेशिया की स्वतंत्रता की 50वीं वर्षगांठ के मौके पर उन्हें सर्वोच्च राष्ट्रीय पुरस्कार ‘ बिनतांग जासू उतमा‘ प्रदान किया गया|
मृत्यु
बीजू पटनायक का निधन 17 अप्रैल 1997 को ह्रदय और सांस की बीमारी के चलते हो गया।भुवनेश्वर के एयरपोर्ट को बीजू पटनायक एयरपोर्ट नाम दिया गया है। बीजू का जन्म दिवस 5 मार्च उड़ीसा में पंचायती राजदिवस के रूप में मनाया जाता है।उड़ीसा में बीजू के नाम पर कई संस्थान हैं।
Image Source:- https://en.wikipedia.org/wiki/Biju_Patnaik

