रांची/खूंटी: खूंटी पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है. पीएलएफआई उग्रवादी संगठन के सक्रिय सदस्य राजेश महतो उर्फ राजेश यादव को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. आरोपी लंबे समय से पुलिस के रडार पर था. जिले में लेवी, धमकी और आगजनी जैसी घटनाओं में उसका नाम सामने आ रहा था. पुलिस ने उसके पास से देसी पिस्तौल, जिंदा कारतूस, उग्रवादी पर्चे और मोबाइल फोन बरामद किया है.
ऐसे हुई नक्सली राजेश महतो की गिरफ्तारी
12 मई को खूंटी के पुलिस अधीक्षक ऋषभ गर्ग को गुप्त सूचना मिली थी कि कर्रा थाना कांड संख्या 33/26 का प्राथमिक अभियुक्त और पीएलएफआई का सक्रिय सदस्य राजेश महतो किसी निजी काम से खूंटी आने वाला है. सूचना मिलते ही तोरपा के एसडीपीओ क्रिस्टोफर केरकेट्टा के नेतृत्व में विशेष छापेमारी टीम का गठन किया गया.
छापेमारी टीम ने खूंटी-तिरला मार्ग स्थित निर्माणाधीन बस स्टैंड के पास एक संदिग्ध शख्स को देखा. पुलिस को देखते ही वह भागने लगा, लेकिन जवानों ने पीछा कर उसे पकड़ लिया. पूछताछ में उसने अपना नाम मोहन कुमार उर्फ राजेश महतो उर्फ राजेश यादव बताया. गिरफ्तार आरोपी रांची जिले के बेड़ो थाना क्षेत्र स्थित गायत्री नगर का रहने वाला है.
निशानदेही पर देसी पिस्तौल और कारतूस बरामद
पुलिस की पूछताछ के दौरान मिली जानकारी के आधार पर कर्रा थाना क्षेत्र के कटमकूकू गांव में एक नवनिर्मित मकान में छापेमारी की गई. वहां कमरे के अंदर मिट्टी में गाड़कर रखा गया एक देसी पिस्तौल, दो कारतूस, उग्रवादी पर्चे और मोबाइल फोन बरामद किया गया. मामले में आर्म्स एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया है.
कई थानों की पुलिस को थी तलाश
एसपी ऋषभ गर्ग ने बताया कि राजेश महतो के खिलाफ बेड़ो, कर्रा, खूंटी और तोरपा थाना में कई मामले दर्ज हैं. हाल के दिनों में कर्रा थाना क्षेत्र में दो रोड रोलर जलाने और गैस एजेंसी संचालक के यहां फायरिंग की घटना में भी उसका नाम सामने आया था. पुलिस के मुताबिक वह अपने सहयोगियों के जरिए व्यवसायियों को धमकाकर लेवी वसूली करवाता था.
पुलिस की जांच में सामने आए दो संदिग्ध एप
जांच के दौरान पुलिस को आरोपी के मोबाइल फोन से दो संदिग्ध एप की जानकारी मिली है. इनमें एक का नाम ‘जंगी एप’ और दूसरा ‘टू इन मी एप’ बताया जा रहा है. एसपी का कहना है कि इन्हीं एप के जरिए राजेश महतो अपने साथियों से संपर्क में रहता था. एसपी ने बताया कि पहले गिरफ्तार किए गए कुछ अन्य युवकों के मोबाइल फोन में भी इन एप का इस्तेमाल मिलने की जानकारी सामने आई थी.
शुरुआती जांच में पता चला है कि इन एप के जरिए बातचीत करने पर मोबाइल नंबर और लोकेशन ट्रेस करना काफी मुश्किल हो जाता है. इसी वजह से उग्रवादी नेटवर्क गुप्त तरीके से संपर्क बनाए रखने में इनका इस्तेमाल कर रहा था. पुलिस का मानना है कि राजेश महतो की गिरफ्तारी से पीएलएफआई नेटवर्क से जुड़े कई अन्य लोगों तक पहुंचने में मदद मिलेगी. खूंटी पुलिस अब आरोपी के मोबाइल डाटा और संपर्कों की गहन जांच कर रही है.


