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    Home » भाद्रपद अमावस्या पर करें इन 5 चीजों का दान, पितृ दोष से मिलेगी मुक्ति और बरसेगा आशीर्वाद

    भाद्रपद अमावस्या पर करें इन 5 चीजों का दान, पितृ दोष से मिलेगी मुक्ति और बरसेगा आशीर्वाद

    September 11, 2026 धार्मिक 2 Mins Read
    Bhadrapada Amavasya Daan
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    सनातन धर्म में भाद्रपद मास की अमावस्या तिथि का अत्यंत पावन और विशेष धार्मिक महत्व माना गया है। इस पुण्यकारी दिन पवित्र नदियों में स्नान करने, दान-पुण्य करने और पूर्वजों (पितरों) के निमित्त श्राद्ध व तर्पण करने का विधान है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अमावस्या पर सच्ची श्रद्धा के साथ जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और अन्य (Bhadrapada Amavasya Daan) उपयोगी वस्तुओं का दान करने से पितृ प्रसन्न होते हैं।

    भाद्रपद अमावस्या पर अन्न दान का महत्व 

    शास्त्रों में अन्नदान को सभी दानों में श्रेष्ठ माना गया है। अमावस्या के दिन किसी निर्धन या असहाय व्यक्ति को गेहूं, चावल, आटा और दालें दान करनी चाहिए। मान्यता है कि भूखे और जरूरतमंद लोगों को आदरपूर्वक अन्न भेंट करने से घर की रसोई में सदैव अन्नपूर्णा देवी का वास रहता है और परिवार में कभी अन्न-धन की कमी नहीं होती।

     वस्त्र और जूते-चप्पल का दान 

    अमावस्या के अवसर पर किसी गरीब या दीन-हीन व्यक्ति को नवीन अथवा स्वच्छ वस्त्र भेंट करना महापुण्य माना गया है। मौसम के अनुकूल (गर्म या सूती) कपड़े दान करने से पितर अत्यंत प्रसन्न होते हैं। प्राचीन काल से ही पितरों के निमित्त जूते, चप्पल और छाता दान करने की परंपरा रही है। माना जाता है कि इससे परलोक मार्ग में पूर्वजों को सुखद अनुभूति होती है और जातक को जीवन के कष्टों से मुक्ति मिलती है।

    गुड़ और शुद्ध घी का दान 

    भारतीय संस्कृति और ज्योतिष शास्त्र में गुड़ को (Bhadrapada Amavasya Daan) सकारात्मक ऊर्जा, आरोग्यता और सूर्य-बृहस्पति की शुभता का प्रतीक माना जाता है।शुद्ध देसी घी का दान करने से घर का वास्तुदोष शांत होता है। किसी जरूरतमंद को शुद्ध घी, गुड़ या इन दोनों से बने पकवान भेंट करने से पुण्य फल में कई गुना वृद्धि होती है।

    पितरों के निमित्त तर्पण, प्रार्थना और भोजन 

    भाद्रपद अमावस्या के दिन विधि-विधान की जानकारी रखने वाले जातकों को दक्षिण दिशा की ओर मुख करके पितरों को जल और तिल से तर्पण देना चाहिए। इस दिन घर पर बने सात्विक भोजन से पहले पंचबलि (गाय, कौआ, कुत्ता, चींटी और देव) निकालें, फिर ब्राह्मणों या भूखे लोगों को श्रद्धापूर्वक भोजन कराएं।

     

     

     

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