नई दिल्ली: शुक्रवार की मध्यरात्रि जैसे ही घड़ी की सुइयों ने 12 बजाए, समूचा देश भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के उल्लास और भक्ति में सराबोर हो गया। प्रमुख मंदिरों से लेकर घर-घर में घंटे, घड़ियाल (Krishna Janmashtami Celebrations) और शंखनाद गूंज उठे। चारों तरफ ‘जय कन्हैया लाल की’ और ‘नंद के घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की’ के जयघोष सुनाई देने लगे।
Krishna Janmashtami Celebrations – जन्माष्टमी को लेकर सुबह से ही बाजारों, घरों और देवालयों में विशेष उत्साह का माहौल देखा गया। श्रद्धालुओं ने लड्डू गोपाल के लिए नवीन वस्त्र (पोशाक), नक्काशीदार मुकुट, बांसुरी, मोरपंख और आभूषण खरीदे। घरों के पूजा स्थलों को सुगंधित फूलों, गुब्बारों और रोशनी से सजाया गया, जबकि मंदिरों में भव्य विद्युत सज्जा और कान्हा के जीवन से जुड़ी मनोहारी झांकियां प्रस्तुत की गईं।
12 बजे अवतरित हुए नंदलाल: पंचामृत से हुआ अभिषेक
रात 12 बजते ही श्रद्धालुओं ने शंख ध्वनि के बीच लड्डू गोपाल का दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से निर्मित पंचामृत से महाभिषेक संपन्न कराया। अभिषेक के पश्चात कान्हा को स्वच्छ व नवीन वस्त्र धारण कराए गए और मोरपंख, चंदन तिलक, बांसुरी व कुंडल आदि आभूषणों से अलौकिक श्रृंगार किया गया। श्रृंगार पूर्ण होने के बाद बाल गोपाल को पुष्पों से सुसज्जित सुंदर पालने में विराजमान कराया गया और सभी भक्तों ने श्रद्धाभाव से उन्हें झूला झुलाया।
माखन-मिश्री और धनिया पंजीरी का महाभोग
भगवान श्रीकृष्ण को उनके प्रिय माखन-मिश्री, पारंपरिक धनिया पंजीरी, पंचमेवा, मौसमी फल और मावे की मिठाइयों का श्रद्धापूर्वक भोग अर्पित किया गया। सनातन परंपरा के अनुसार,भगवान विष्णु और उनके अवतारों को अर्पित किए जाने वाले नैवेद्य में तुलसी पत्र का होना अनिवार्य माना जाता है, जिसके बिना भोग अधूरा रहता है।पूजन के दौरान ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ महामंत्र का जप किया और कर्पूर व घी के दीपकों से भगवान की भव्य आरती उतारी।


