बेमेतरा: छत्तीसगढ़ में बेमेतरा जिले के मोहतरा गांव में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। खेत में काम करने के दौरान अचानक फटे विद्युत ट्रांसफार्मर ने तीन अन्नदाताओं की जिंदगी लील ली। रायपुर के अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच कड़े संघर्ष के बाद तीनों किसानों ने दम तोड़ दिया। जब एक ही परिवार के पिता-पुत्र की अर्थियां एक साथ उठीं, तो पूरे गांव में मातम पसर गया।
⚡ किसी बम की तरह तेज धमाके के साथ फटा ट्रांसफार्मर
घटना रविवार सुबह करीब 8:30 बजे की है। मोहतरा निवासी राधेश्याम चंद्राकर (50) और उनके इकलौते बेटे छन्नू चंद्राकर (32) अपने खेत में काम कर रहे थे। तभी अचानक पास में लगा हाई-वोल्टेज विद्युत ट्रांसफार्मर किसी बम की तरह तेज धमाके के साथ फट गया।
धमाका इतना भीषण था कि ट्रांसफार्मर के भीतर भरा सैकड़ों लीटर खौलता हुआ तेल हवा में उछलकर दूर तक फैल गया। पिता-पुत्र इस खौलते तेल की सीधी चपेट में आ गए। वहीं, पास के ही दूसरे खेत में काम कर रहे 62 वर्षीय बुजुर्ग किसान ईश्वर पटेल भी इस जानलेवा तेल की जद में आने से गंभीर रूप से झुलस गए।
चीख-पुकार सुनकर दौड़े ग्रामीणों ने तीनों को तुरंत बेमेतरा शासकीय जिला अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद उनकी नाजुक हालत को देखते हुए रायपुर रेफर कर दिया। रायपुर के विशेषज्ञ डॉक्टरों की देखरेख में पांच दिनों तक इलाज चला, लेकिन तीनों किसानों की सांसें टूट गईं।
😭 एक ही घर से उठी दो अर्थियां, आंसुओं में डूबा गांव
शवों के गांव पहुंचते ही मोहतरा में मातम छा गया। लगातार हो रही रिमझिम बारिश के बीच, पिता राधेश्याम और पुत्र छन्नू का एक साथ अंतिम संस्कार किया गया। एक ही चिता पर जब पिता-पुत्र को मुखाग्नि दी गई, तो वहां मौजूद हर आंख नम थी।
इस हादसे ने हंसते-खेलते परिवार को उजाड़ कर रख दिया है। मृतक छन्नू अपने पीछे दो मासूम बच्चों को छोड़ गया है, जिनके सिर से पिता का साया हमेशा के लिए उठ गया। राधेश्याम और छन्नू चंद्राकर का अंतिम संस्कार कर दिया गया है। वहीं, तीसरे मृतक ईश्वर पटेल का शव भी पोस्टमार्टम के बाद आज मोहतरा गांव लाया जाएगा, जहां उनका अंतिम संस्कार होगा।
😡 सिस्टम की बेरुखी: पीड़ित परिवारों की सुध लेने नहीं पहुंचे अधिकारी
ग्रामीणों की मानें तो इस दर्दनाक हादसे के बाद गांव के तीन घर तबाह हो गए, लेकिन बिजली विभाग या शासन-प्रशासन का कोई भी जिम्मेदार अधिकारी पीड़ित परिवारों का हाल जानने और सांत्वना देने तक गांव नहीं पहुंचा। प्रशासन की इस बेरुखी से ग्रामीणों में भारी आक्रोश है।


