मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में संदिग्ध संक्रामक बीमारियों के चलते 30 से अधिक मासूम बच्चों की मौत को लेकर कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार पर तीखा हमला बोला है।
पीड़ित आदिवासी परिवारों से मुलाकात के बाद उन्होंने राज्य की स्वास्थ्य व प्रशासनिक व्यवस्था पर कड़े सवाल उठाए।
राहुल गांधी ने कहा कि यह मध्य प्रदेश सरकार की पूरी तरह से विफलता है। उन्होंने इसे 100 प्रतिशत सरकारी नाकामी करार देते हुए ऐलान किया कि वे इस गंभीर मुद्दे को लोकसभा में पूरी मजबूती के साथ उठाएंगे। उन्होंने कहा कि वे केवल इसी मामले को नहीं, बल्कि देशभर में आदिवासियों के अधिकारों और उनके साथ हो रहे अन्याय के हर मुद्दे को संसद के पटल पर रखेंगे।
📢 ‘जल, जंगल और जमीन छीनने के समय ही याद आते हैं आदिवासी’: राहुल गांधी का गंभीर आरोप
आदिवासी अधिकारों को लेकर सरकार पर किए गए तीखे प्रहार:
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संसाधनों पर नजर: राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि बीजेपी शासित राज्यों में सत्ताधारियों को आदिवासी समाज की याद केवल तभी आती है, जब उनसे जल, जंगल और जमीन छीनने की जरूरत होती है; काम पूरा होते ही सरकार उन्हें उनके हाल पर छोड़ देती है।
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योजनाओं का अधूरा लाभ: उन्होंने कहा कि सरकार यदि जनकल्याणकारी योजनाएं चला रही है, तो उसका शत-प्रतिशत फायदा इन पिछड़े आदिवासी परिवारों तक पहुंचना चाहिए।
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मदद का आश्वासन: जमीनी स्थिति देखकर गहरा दुख व्यक्त करते हुए उन्होंने पीड़ित ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि कांग्रेस पार्टी पूरी तरह उनके साथ खड़ी है और हर संभव सहायता प्रदान करेगी।
🛖 बैहर तहसील के जगला गांव पहुंचे राहुल: पीड़ित परिजनों से मिलकर साझा किया दर्द
दौरे और जमीनी हकीकत का ब्योरा:
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मृतक बच्चों के परिजनों से भेंट: राहुल गांधी गुरुवार को संक्रामक बीमारियों के कारण अपनी संतानें खो चुके 30 से अधिक पीड़ित परिवारों से मिलने सीधे बैहर तहसील के सुदूर जगला गांव पहुंचे।
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सहानुभूति और सांत्वना: उन्होंने शोकाकुल परिजनों के साथ समय बिताया, उनकी व्यथा सुनी और उन्हें ढांढस बंधाया।
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सत्ता पक्ष पर कटाक्ष: उन्होंने दावा किया कि इतनी बड़ी मानवीय त्रासदी और इतने मासूम बच्चों की मौत की खबर सार्वजनिक होने के बावजूद, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव या सत्ता पक्ष का कोई भी जिम्मेदार राजनेता इन पीड़ित परिवारों का हाल जानने नहीं पहुंचा।
📱 सोशल मीडिया के जरिए साधा निशाना: ‘इस गहरे दुख में आप अकेले नहीं हैं’
बालाघाट दौरे से पहले ‘एक्स’ (ट्विटर) पर जारी किया गया विस्तृत बयान:
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दौरे का मुख्य उद्देश्य: बालाघाट रवाना होने से पूर्व राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर लिखा कि वे उन आदिवासी परिवारों का आंसू पोंछने जा रहे हैं, जिन्होंने सरकारी तंत्र की लापरवाही और अज्ञात बीमारियों के कारण अपने मासूम बच्चों को खो दिया है।
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एकजुटता का संदेश: उन्होंने स्पष्ट किया कि वे पीड़ित परिवारों को यह एहसास कराने आए हैं कि वे इस मुश्किल वक्त में कतई अकेले नहीं हैं।
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केन-बेतवा विस्थापितों की चर्चा: उन्होंने अपनी पोस्ट में हाल ही में मिले केन-बेतवा लिंक परियोजना से प्रभावित आदिवासियों का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि बांध के कारण गांव डूब रहे हैं, लेकिन ग्रामीणों को पुनर्वास और उचित मुआवजा देने के बजाय दमन का सामना करना पड़ रहा है।
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शिक्षा व्यवस्था पर सवाल: इंदौर में ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि आदिवासी बहुल क्षेत्रों में स्कूल-कॉलेज खंडहर पड़े हैं, हॉस्टलों में अव्यवस्था है और भर्ती परीक्षाओं में धांधली कर युवाओं के भविष्य और आरक्षण अधिकारों से खिलवाड़ किया जा रहा है।
⚡ ‘आदिवासी देश के मूल मालिक, वनवासी नहीं’: राहुल ने बीजेपी-आरएसएस की सोच पर उठाए सवाल
वैचारिक दृष्टिकोण और आदिवासियों के संघर्ष पर जोर:
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मूल मालिक बनाम वनवासी: राहुल गांधी ने कहा कि बीजेपी और आरएसएस की विचारधारा आदिवासियों को देश का मूल मालिक मानने के बजाय उन्हें केवल ‘वनवासी’ मानती है, जो उनके जल, जंगल, जमीन, सम्मान और रोजगार के अधिकारों को कमजोर करती है।
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अहंकार का आरोप: उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता के अहंकार में चूर सरकार आम जनता और आदिवासियों की जायज आवाज सुनने को तैयार नहीं है।
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संसद में आवाज उठाने का संकल्प: अंत में उन्होंने आदिवासी भाई-बहनों को भरोसा दिया कि वे उनके हर संघर्ष में अग्रिम पंक्ति में खड़े रहेंगे और इस गूंगी-बहरी व्यवस्था के सामने उनकी आवाज को पूरी ताकत से बुलंद करेंगे।


