बिलासपुरछत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बहुचर्चित एनसीपी नेता रामावतार जग्गी हत्याकांड मामले में आरोपी अमित जोगी को उम्र कैद की सजा सुनाई है. अदालत ने 31 मई 2007 के उस फैसले को पलट दिया, जिसमें (life imprisonment to Amit Jogi) ट्रायल कोर्ट ने अमित जोगी को बरी किया था, जबकि अन्य सहआरोपियों को दोषी ठहराया गया था.

उम्रकैद की सज़ा, तीन हफ्ते में सरेंडर का आदेश

कोर्ट ने अमित जोगी को भारतीय दंड संहिता की धारा 302, 120-बी के तहत दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास और एक हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है, अर्थदंड अदा न करने पर छह माह अतिरिक्त कठोर कारावास का प्रावधान रखा गया है. वर्तमान में जमानत पर चल रहे अमित जोगी को हाईकोर्ट ने आदेश दिया है कि वे तीन सप्ताह के भीतर संबंधित ट्रायल कोर्ट के समक्ष आत्मसमर्पण करें, अन्यथा ट्रायल कोर्ट उन्हें हिरासत में लेकर सजा भोगने के लिए जेल भेजे.

ट्रायल कोर्ट के निर्णय पर कड़ी टिप्पणी

हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के अमित जोगी को दूसरों से अलग मानते हुए बरी करने को “पूर्णतः अवैध, गलत और साक्ष्यों के प्रतिकूल” करार दिया. कोर्ट ने कहा कि जिस साक्ष्य के आधार पर अन्य आरोपियों को साजिश का दोषी माना गया, उसी साक्ष्य को अमित जोगी के मामले में बिना ठोस कारण के खारिज कर दिया गया था.अदालत ने (life imprisonment to Amit Jogi) पाया कि पूरी साजिश का मास्टरमाइंड अमित जोगी थे, जो तत्कालीन मुख्यमंत्री के पुत्र होने के कारण प्रभावशाली स्थिति में थे.

कहां रची गई थी हत्याकांड की साजिश

आपको बता दें कि हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने सीबीआई की अपील और शिकायतकर्ता सतीश जग्गी की पुनरीक्षण याचिका पर सुनवाई की. जिसमें अदालत ने पाया कि एनसीपी की रैली को हर हाल में असफल करने और राजनीतिक लाभ हासिल करने के लिए मई 2003 में रायपुर स्थित ग्रीन पार्क होटल, बत्रा हाउस और तत्कालीन मुख्यमंत्री आवास में बैठकों की श्रृंखला चली.इसमें मुख्य रूप से अमित जोगी, चिमन सिंह, याह्या देबर और अभय गोयल समेत अन्य आरोपी शामिल हुए.इन्हीं बैठकों में एनसीपी को कमजोर करने और उसके कोषाध्यक्ष रामावतार जग्गी को रास्ते से हटाने की साज़िश रची.

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