उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक द्वारा युवाओं के रोजगार को लेकर दिए गए एक बयान पर राज्य में राजनीतिक बवाल खड़ा हो गया है। डिप्टी सीएम ने युवाओं को सुझाव देते हुए कहा था कि वे (Leave job and drive an e-rickshaw) केवल सरकारी नौकरी के पीछे न भागें, बल्कि ई-रिक्शा चलाने जैसे स्वरोजगार अपनाएं और अपने परिवार व बच्चों के साथ बेहतर समय बिताएं।
Leave job and drive an e-rickshaw – इस बयान के सामने आते ही विपक्षी दलों—समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस—ने इसे युवाओं का अपमान बताते हुए सरकार की रोजगार नीति पर तीखा हमला बोल दिया है। दूसरी तरफ, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के प्रमुख और यूपी सरकार में कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर खुलकर डिप्टी सीएम के बचाव में उतर आए हैं।
बचाव में उतरे कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर
मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि इस बयान में कुछ भी अनुचित नहीं है। उत्तर प्रदेश की आबादी करीब 25 करोड़ है और किसी भी सरकार के लिए हर एक व्यक्ति को सरकारी नौकरी देना मुमकिन नहीं है। उन्होंने कहा कि जो योग्य हैं, उन्हें सरकारी नौकरियां मिल रही हैं। जिन्हें नौकरी नहीं मिल पा रही, वे स्वरोजगार या अन्य काम कर सकते हैं; डिप्टी सीएम ने भी यही समझाने का प्रयास किया है। राजभर ने कहा, “हमने भी कभी टेम्पो चलाया था और आज राज्य में सरकार चला रहे हैं।”
विपक्ष ने रोजगार नीति को लेकर सरकार को घेरा
बयान वायरल होते ही समाजवादी पार्टी के सांसद पुष्पेंद्र सरोज समेत कई विपक्षी नेताओं ने सरकार को आड़े हाथों लिया और युवाओं की मेहनत का मजाक बताया। विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि एक तरफ सरकार लाखों युवाओं को रोजगार और नौकरियां देने के बड़े-बड़े दावे करती है, वहीं दूसरी तरफ पढ़े-लिखे नौजवानों को पकौड़े तलने और ई-रिक्शा चलाने की नसीहतें दी जा रही हैं।


