नई दिल्ली: चालू वर्ष की जुलाई-सितंबर तिमाही के दौरान भारतीय मोबाइल बाजार में चीनी स्मार्टफोन ब्रांड्स की हिस्सेदारी में भारी गिरावट दर्ज की गई है, जो घटकर अब 67 से 68 प्रतिशत के बीच रह गई है। यह पिछले आठ वर्षों से भी अधिक समय में सबसे निचला स्तर है। बाजार विश्लेषकों के अनुसार, मेमोरी चिप की कीमतों में रिकॉर्ड उछाल आने के कारण इन कंपनियों को अपने बजट और कम कीमत वाले स्मार्टफोन के मॉडल्स में कटौती करनी पड़ी है, जबकि (Mobile Market Trends India) यही वह सेगमेंट था जिससे उन्हें सबसे अधिक बिक्री और मुनाफा मिलता था।
भारतीय ब्रांड्स की हिस्सेदारी में आया जबरदस्त उछाल
सस्ते और एंट्री-लेवल फोन के बाजार में अभी भी भारी मांग बनी हुई है, लेकिन डिवाइस महंगे होने के कारण आम उपभोक्ता अपना बजट बढ़ाने से कतरा रहे हैं। ऐसे में घरेलू भारतीय ब्रांड इस स्थिति का पूरा फायदा उठा रहे हैं और वॉल्यूम बढ़ाने पर फोकस कर रहे हैं। ताजा आंकड़ों के अनुसार, पिछली तिमाही में भारतीय ब्रांड्स की कुल (Mobile Market Trends India) हिस्सेदारी बढ़कर 7 प्रतिशत हो गई है, जो एक साल पहले मात्र 2 प्रतिशत थी।
स्मार्टफोन शिपमेंट में आई गिरावट और भविष्य की राह
मोबाइल बाजार में अनिश्चितता का दौर अभी भी जारी है। विभिन्न रिपोर्ट्स के अनुसार, जुलाई-सितंबर तिमाही में भारत के कुल स्मार्टफोन शिपमेंट में पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 20 से 26 प्रतिशत की भारी गिरावट आई है और यह घटकर 35.8 मिलियन यूनिट रह गया है, जो पिछले एक दशक का सबसे निचला स्तर है। मेमोरी कॉस्ट बढ़ने से फोन की कीमतें बढ़ी हैं, जिससे ग्राहकों ने नई खरीदारी फिलहाल टाल दी है।


