गाजियाबाद। राष्ट्रीय राजधानी से सटे उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद (नंदग्राम क्षेत्र) में दो दिन पहले हुए अश्वनी उर्फ आशु की संदिग्ध मौत के मामले में पुलिस ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। अश्वनी की हत्या किसी बाहरी या अज्ञात हमलावर ने नहीं, बल्कि उसके अपने ही 80 वर्षीय दादा भीम सिंह और सगे चाचा राजेश ने मिलकर की थी। पुलिस ने (Ghaziabad Crime News) त्वरित कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।
पुलिस की कड़ाई से पूछताछ में आरोपी दादा भीम सिंह ने अपना जुर्म कबूल करते हुए पूरी वजह बताई। भीम सिंह ने बताया कि पोता अश्वनी अत्यधिक शराब पीने का आदी हो चुका था और हर दिन शराब खरीदने के लिए उनसे पैसों की मांग करता था। पैसे देने से मना करने पर वह बुजुर्ग दादा के साथ गाली-गलौज और मारपीट करता था। रोज-रोज के शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न से दुखी होकर दादा भीम सिंह ने अपने छोटे बेटे राजेश के साथ मिलकर उसे रास्ते से हटाने की साजिश रची।
2.5 लाख रुपये छीने और बेच दिया मोबाइल
एसीपी नंदग्राम जियाउद्दीन ने मामले का खुलासा करते हुए बताया कि मृतक अश्वनी नंदग्राम थाना क्षेत्र के नूर नगर सिहानी में अपने दादा के साथ रहता था। उसकी हरकतों और मारपीट से तंग आकर उसके माता-पिता पहले ही उससे अलग होकर किराए के मकान में रहने लगे थे। मूल रूप से हापुड़ के रहने वाले भीम सिंह ने अपनी पैतृक जमीन और मकान का एक हिस्सा नौ लाख रुपये में बेचा था। कर्ज चुकाने के बाद बचे ढाई लाख रुपये अश्वनी जबरन उनसे छीन ले गया था।
शराब में पिलाई नींद की गोली, फिर सोते समय गमछे से घोंटा गला
एसीपी जियाउद्दीन के मुताबिक, 12 सितंबर की रात अश्वनी फिर से नशे की हालत में घर पहुंचा और दादा से पैसे मांगने लगा। इस बार दादा भीम सिंह ने पैसे देने के बजाय चालाकी से शराब में नींद की गोलियां मिलाकर उसे पीने के लिए दे दीं। अत्यधिक नशे और नींद की गोलियों के असर से अश्वनी छत पर जाकर गहरी नींद में सो गया। जब वह पूरी तरह बेसुध हो गया, तो भीम सिंह और राजेश ने छत पर जाकर गमछे से उसका गला घोंट दिया और लाठी से भी हमला किया।


