मुंबई/चंद्रपुर : पावन पर्व नवरात्रि के आगमन से पूर्व महाराष्ट्र में गरबा और डांडिया पंडालों में गैर-हिंदुओं, विशेषकर मुस्लिम समुदाय के प्रवेश को लेकर एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज हो गई है। इस (festival is for everyone) संवेदनशील मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कुछ नेताओं और विभिन्न हिंदुत्ववादी संगठनों द्वारा कड़े प्रतिबंधों की मांग की जा रही है।
festival is for everyone – इसी माहौल के बीच महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की पत्नी अमृता फडणवीस द्वारा चंद्रपुर में दिया गया बयान सार्वजनिक विमर्श का केंद्र बन गया है। जहां एक ओर पंडालों में प्रवेश से पहले पहचान पत्रों की सघन जांच और माथे पर तिलक लगाने जैसी शर्तें थोपने की मांग उठ रही है, वहीं दूसरी ओर अमृता फडणवीस ने सनातन व भारतीय पर्वों की सर्वसमावेशी संस्कृति का हवाला देते हुए एक संतुलित और उदारवादी दृष्टिकोण प्रस्तुत किया है।
अमृता फडणवीस ने कहा कि भारत के पारंपरिक त्योहार सभी वर्गों और समुदायों को साथ लेकर चलने की संस्कृति का प्रतिनिधित्व करते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि कोई मुस्लिम व्यक्ति गरबा पंडाल में आता है, आयोजकों द्वारा तय किए गए नियमों और मर्यादा का पूरी तरह पालन करता है और उत्सव की खुशी में शामिल होता है, तो इसमें किसी प्रकार की आपत्ति नहीं होनी चाहिए।
वीएचपी की सख्त गाइडलाइन और नितेश राणे का कड़ा रुख
भाजपा विधायक नितेश राणे ने सार्वजनिक तौर पर गरबा पंडालों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग उठाई थी। विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने गरबा आयोजकों के लिए विशेष दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसमें पंडालों में प्रवेश पाने वाले प्रत्येक व्यक्ति के माथे पर तिलक लगाने और गेट पर पहचान पत्र की अनिवार्य जांच करने की अपील की गई है ताकि पहचान छिपाकर कोई प्रवेश न कर सके।


