नई दिल्ली: दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में बहुमंजिला पेइंग गेस्ट (PG) इमारत ढहने के दर्दनाक हादसे ने पूरी राजधानी को हिलाकर रख दिया है।
इस भीषण हादसे में अब तक कम से कम 7 लोगों की जान जा चुकी है, जिनमें अधिकांश दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) के छात्र बताए जा रहे हैं। वहीं कई अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिनका उपचार जारी है। इस घटना के बाद दिल्ली पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी पीजी मालिक, उसकी पत्नी और बेटे को गिरफ्तार कर लिया है। इस त्रासदी के बाद राजधानी में चल रहे अनियमित पीजी, अवैध निर्माण और प्रशासनिक मिलीभगत पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
📢 कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने उठाईं 7 प्रमुख मांगें: 1 करोड़ मुआवजा और PG माफिया की जांच की दरकार
प्रवक्ता सौरभ दास द्वारा रखी गई प्रमुख मांगें:
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स्वतंत्र आपराधिक जांच: केवल पीजी मालिक पर ही नहीं, बल्कि नेताओं और अधिकारियों के बीच कथित आपराधिक गठजोड़ तथा बड़े ‘पीजी माफिया’ नेटवर्क की स्वतंत्र व निष्पक्ष जांच कराई जाए।
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इंजीनियरिंग-ग्रेड स्ट्रक्चरल ऑडिट: सभी स्कूल, कॉलेज और छात्र हॉस्टलों/पीजी की इमारतों का समयबद्ध तरीके से स्ट्रक्चरल सेफ्टी ऑडिट हो, अवैध निर्माणों को तुरंत सील किया जाए और प्रभावित छात्रों का पुनर्वास सुनिश्चित हो।
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सार्वजनिक पोर्टल व डेटाबेस: एक पब्लिकली सर्चेबल डेटाबेस बने, जिससे छात्र और अभिभावक किसी भी पीजी में रहने से पहले उसकी कानूनी स्वीकृति और सुरक्षा मानकों की जांच कर सकें।
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सरकारी हॉस्टलों का निर्माण: छात्रों की निजी पीजी पर निर्भरता खत्म करने के लिए दिल्ली विश्वविद्यालय सहित अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए सुरक्षित और स्वायत्त सरकारी हॉस्टल बनाए जाएं।
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मुआवजे की मांग: मृतकों के परिजनों को ₹1 करोड़ तथा घायलों को ₹20 लाख का तत्काल मुआवजा और आर्थिक सहायता दी जाए।
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ऑडिट रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग: 3 जून 2026 को मालवीय नगर होटल अग्निकांड के बाद गठित 13 जिला समितियों की सर्वेक्षण, प्रवर्तन और सीलिंग रिपोर्ट 48 घंटे में सार्वजनिक की जाए। आरोप है कि ये समितियां तीन महीने में ही निष्क्रिय हो गईं।
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मंत्रिस्तरीय जवाबदेही तय हो: शहरी विकास एवं शिक्षा मंत्री आशीष सूद से सवाल करते हुए पूछा गया कि जिला सुरक्षा समितियों की कार्यप्रणाली धीमी या बंद क्यों हुई, इसकी राजनीतिक जवाबदेही तय हो।
⚖️ दिल्ली हाई कोर्ट सख्त: ‘सिर्फ मालिक ही नहीं, MCD और यूनिवर्सिटी की भी है जिम्मेदारी’
अदालत की कड़ी टिप्पणी और जांच के आदेश:
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उच्चस्तरीय जांच के निर्देश: दिल्ली हाई कोर्ट ने मामले का संज्ञान लेते हुए दिल्ली नगर निगम (MCD) को उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच का स्पष्ट निर्देश दिया है।
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साझा जिम्मेदारी: चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की खंडपीठ ने टिप्पणी की कि ऐसी दुर्भाग्यपूर्ण दुर्घटनाओं की प्राथमिक जिम्मेदारी केवल पीजी हॉस्टल मालिक की नहीं, बल्कि क्षेत्र की निगरानी करने वाली एमसीडी और विश्वविद्यालय प्रशासन की भी बनती है।
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अधिकारियों की पहचान के आदेश: अदालत ने निर्देश दिया कि जांच में तय किया जाए कि इमारत वैध अनुमति से बनी थी या नहीं, किस अधिकारी के स्तर पर चूक हुई और दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ क्या सख्त दंडात्मक कार्रवाई प्रस्तावित की गई है।


