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    Home » नाग पंचमी 2026 पर करें कालसर्प दोष निवारण के ये अचूक उपाय: चांदी के नाग-नागिन का जल प्रवाह और मंत्र जाप

    नाग पंचमी 2026 पर करें कालसर्प दोष निवारण के ये अचूक उपाय: चांदी के नाग-नागिन का जल प्रवाह और मंत्र जाप

    August 17, 2026 धार्मिक 2 Mins Read
    nag panchami 2026
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    ज्योतिषीय गणना के अनुसार जब जन्म कुंडली में राहु और केतु के मध्य सभी सात ग्रह स्थित हो जाते हैं, तब पूर्ण कालसर्प दोष का निर्माण होता है। इस दोष के कारण जातक को जीवन में निरंतर संघर्ष, बनते कार्यों में अनावश्यक विलंब, आर्थिक बाधाओं और गंभीर मानसिक तनाव का सामना करना पड़ता है। वर्ष 2026 में नाग पंचमी का पावन (nag panchami 2026) पर्व सोमवार, 17 अगस्त को श्रद्धापूर्वक मनाया जा रहा है। शास्त्रों के अनुसार नाग पंचमी की पावन तिथि राहु-केतु के दुष्प्रभावों और कालसर्प दोष के प्रभाव को क्षीण करने का सर्वोत्तम अवसर मानी जाती है।

     चांदी के नाग-नागिन का जल प्रवाह और राहु-केतु मंत्रों का ध्यान

    नाग पंचमी के दिन कालसर्प दोष के निवारण हेतु बहते जल में चांदी के नाग-नागिन का जोड़ा प्रवाहित करने का विशेष विधान है:

      • जल प्रवाह विधि: किसी पवित्र नदी या स्वच्छ बहते जल में शुद्ध चांदी से बने नाग-नागिन के जोड़े को ससम्मान प्रवाहित करें।

      • राहु बीज मंत्र: जल प्रवाह करते समय ॐ रां राहवे नमः मंत्र का पूर्ण एकाग्रता से ध्यान व स्मरण करें।

      • केतु बीज मंत्र: इसके उपरांत ॐ कें केतवे नमः मंत्र का जाप करते हुए केतु देव की शांति की प्रार्थना करें।

    शास्त्रसम्मत विधि और निर्मल भाव से यह जल प्रवाह करने पर राहु (nag panchami 2026) और केतु का नकारात्मक प्रभाव समाप्त होने लगता है और करियर व व्यापार में आ रही रुकावटें दूर होती हैं।

     रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय जाप और नाग गायत्री मंत्र का प्रभाव

    नाग पंचमी के पावन अवसर पर शिवालय में शिवलिंग पर जलाभिषेक अथवा पंचामृत से दुग्धाभिषेक करना अत्यंत फलदायी माना गया है। अभिषेक संपन्न करने के बाद महामृत्युंजय मंत्र का कम से कम 108 बार या 11 माला विधिवत जाप करें। इसके साथ ही विशेष रूप से नाग गायत्री मंत्र का अनुष्ठान करें:

    ॐ नवकुलाय विद्महे विषदन्ताय धीमहि तन्नो सर्पः प्रचोदयात्

    इस पावन नाग गायत्री मंत्र की 3 या 5 माला का जाप करने से कालसर्प दोष के अशुभ प्रभावों में भारी कमी आती है। देवाधिदेव महादेव की आराधना से राहु-केतु जनित सभी मानसिक व भौतिक परेशानियां शांत हो जाती हैं और जीवन में संतुलन स्थापित होता है।

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