धार्मिक एवं ज्योतिष: सनातन धर्म में सावन (श्रावण) का महीना भगवान शिव की अनन्य भक्ति के लिए अत्यंत विशेष माना जाता है। इस पवित्र महीने में शिव पूजा, जलाभिषेक और रुद्राभिषेक के साथ-साथ कई (Nag Panchami 2026) प्रमुख व्रत और त्योहार भी श्रद्धापूर्वक मनाए जाते हैं।
नाग पंचमी की पौराणिक कथा
पौराणिक मान्यता के अनुसार, राजा परीक्षित की मृत्यु तक्षक नाग के डसने (सर्पदंश) से हुई थी। पिता की मृत्यु का बदला लेने के लिए उनके पुत्र राजा जन्मेजय ने संपूर्ण नाग जाति के विनाश के लिए एक महाविनाशकारी ‘सर्प यज्ञ’ (सर्प सत्र) का आयोजन किया। कहा जाता है कि इस यज्ञ की आहुतियों में खिंचे चले आकर विश्व भर के बड़े-बड़े सांप और नाग जलकर भस्म होने लगे, जिससे नाग वंश के अस्तित्व पर गहरा संकट मंडराने लगा।
Nag Panchami 2026 – तभी महान आस्तिक मुनि ने अपनी कुशाग्र बुद्धि, ज्ञान और तपस्या के बल पर राजा जन्मेजय को समझा-बुझाकर इस सर्प यज्ञ को तत्काल प्रभाव से बंद करने के लिए राजी कर लिया। इस प्रकार आस्तिक मुनि के प्रयासों से नाग वंश का पूर्ण विनाश होने से बच गया। धार्मिक शास्त्रों के अनुसार, यह ऐतिहासिक घटना श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को ही घटी थी। इसी वजह से इस शुभ तिथि को नाग देवता की पूजा करने की परंपरा आरंभ हुई।
जानिए कालसर्प और सर्प दोष से मुक्ति का रहस्य
हिंदू धर्म और वैदिक संस्कृति में नागों को केवल एक विषैले जीव के रूप में नहीं, बल्कि ‘नाग देवता’ (दैवीय शक्ति) के रूप में भी पूजनीय माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन पूरी श्रद्धा के साथ नाग देव की आराधना करने से कुंडली के कालसर्प दोष, नाग दोष और सर्प भय (सांप के काटने का डर) से मुक्ति मिल जाती है।
नाग पंचमी 2026 कब है?
द्रिक पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि 16 अगस्त 2026 को शाम 4 बजकर 52 मिनट से प्रारंभ होगी और अगले दिन 17 अगस्त 2026 को शाम 5:00 बजे तक विद्यमान रहेगी।
उदया तिथि के सर्वमान्य सिद्धांत के आधार पर नाग पंचमी का मुख्य पर्व 17 अगस्त 2026, सोमवार को ही पूरे देश में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा।
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नाग पंचमी 2026 तिथि: 17 अगस्त 2026 (सोमवार)
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पूजा का सबसे शुभ मुहूर्त: सुबह 05:51 बजे से सुबह 08:29 बजे तक
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