मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार के लिए काला दिन साबित हुआ। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही सूचकांकों में 0.5% से अधिक की भारी गिरावट दर्ज की गई। बाजार खुलने के महज एक मिनट के भीतर निवेशकों को 3.75 लाख करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा। साथ ही, कोस्पी (कोरियाई बाजार) द्वारा पीछे छोड़े जाने के बाद भारत अब वैश्विक (heavy fall in stock market) स्तर पर 7वां सबसे बड़ा शेयर बाजार बन गया है।
🔥 गिरावट के पीछे के मुख्य कारण
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मध्य पूर्व तनाव: ईरान-अमेरिका और इजराइल-हिज़्बुल्लाह के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने वैश्विक अनिश्चितता बढ़ा दी है।
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FII की बिकवाली: विदेशी निवेशकों का भारतीय बाजारों से मोहभंग जारी है। सिर्फ सोमवार को उन्होंने 3,912 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, और इस साल अब तक वे 2.47 लाख करोड़ रुपये निकाल चुके हैं।
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तेल की कीमतों में उछाल: ब्रेंट क्रूड 95 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया है, जिससे ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ के बंद होने का डर बढ़ गया है।
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आर्थिक चिंताएं: जीडीपी ग्रोथ अनुमानों में कटौती और महंगाई का बढ़ता स्तर भी बाजार के लिए नकारात्मक संकेत है।
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📊 बाजार का प्रदर्शन: कौन गिरा, कौन चढ़ा?
इंडेक्स में बजाज फाइनेंस (-3%), भारत इलेक्ट्रॉनिक्स (BEL), बजाज फिनसर्व, और L&T जैसे दिग्गजों में 1-2% की गिरावट दिखी। इसके विपरीत, आईटी सेक्टर ने बाजार को सहारा देने की कोशिश की, जहाँ इंफोसिस, टीसीएस, टेक महिंद्रा और एचसीएल टेक में 1-3% की बढ़त दर्ज की गई। निफ्टी आईटी इंडेक्स ने विपरीत दिशा में (heavy fall in stock market) चलते हुए लगभग 2 फीसदी की छलांग लगाई।


