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    Home » ‘चूल्हा बंद और चिता आंदोलन’, जानें केन-बेतवा लिंक परियोजना को लेकर आदिवासियों में क्यों है उबाल?

    ‘चूल्हा बंद और चिता आंदोलन’, जानें केन-बेतवा लिंक परियोजना को लेकर आदिवासियों में क्यों है उबाल?

    April 15, 2026 मध्य प्रदेश 2 Mins Read
    chulha bandh and pyre movement
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     मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में केन-बेतवा लिंक परियोजना के चलते विस्थापन का सामना कर रहे आदिवासी समुदाय का धैर्य अब टूटने लगा है. लंबे समय से चल रहे विरोध ने आज कई मोर्चों पर एक साथ उग्र रूप ले लिया, जिससे प्रशासन की चिंता बढ़ गई है. प्रभावित ग्रामीणों ने केन नदी में उतरकर जल सत्याग्रह किया और (chulha bandh and pyre movement) घंटों पानी में खड़े रहकर यह संदेश दिया कि जिस नदी को विकास का आधार बताया जा रहा है, वही आज उनके अस्तित्व पर संकट बन गई है.

    इसके साथ ही मिट्टी सत्याग्रह का सिलसिला दूसरे दिन भी जारी रहा. ग्रामीणों ने अपने खेतों की मिट्टी हाथ में लेकर यह संकल्प दोहराया कि वे अपने पूर्वजों की जमीन किसी भी कीमत पर नहीं छोड़ेंगे. पिछले दस दिनों से जारी चिता आंदोलन भी अब और अधिक गंभीर हो गया है. लोग प्रतीकात्मक चिताओं के पास बैठकर अपने दर्द और आक्रोश को जाहिर कर रहे हैं.

    इसे भी पढ़ें – पहाड़ चीरकर बन रही मध्य प्रदेश की सबसे लंबी रेलवे टनल, 68 KM घटेगी इंदौर से जबलपुर की दूरी

    सामूहिक रूप से भोजन त्यागा

    आंदोलन के समर्थन में कई गांवों में चूल्हा बंद रखा गया है. ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से भोजन त्याग दिया है. महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे भूखे रहकर अपनी मांगों के प्रति एकजुटता दिखा रहे हैं, इस उम्मीद में कि उनकी आवाज राज्य और केंद्र सरकार तक पहुंचेगी.

    chulha bandh and pyre movement – प्रभावित आदिवासियों और किसानों ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उनका कहना है कि परियोजना के लिए जिन ग्राम सभाओं का हवाला दिया जा रहा है, वे पूरी तरह फर्जी हैं. ग्रामीणों ने मांग की है कि इन सभाओं को सार्वजनिक किया जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके. उनका आरोप है कि प्रशासन बिना उचित प्रक्रिया अपनाए लोगों को उनके घरों से बेदखल करने की कोशिश कर रहा है.

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