देश में कोरोना संकट के बीच आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम से 7 मई यानी गुरुवार को बुरी खबर आई कि विशाखापट्टनम आरआर वेंकटपुरम में स्थित विशाखा एलजी पॉलिमर कंपनी से खतरनाक जहरीली गैस का रिसाव हुआ है. गैस का रिसाव इतना तेज था कि फैक्ट्री और उसके आस-पास के करीब 3 किलोमीटर क्षेत्र में लोग सड़कों पर बेहोश होकर गिरने लगे, आंखें जलने लगीं और कुछ लोगों को शरीर पर छाले पड़ने की समस्या होने लगी गैस लीक होने की वजह से आधा दर्जन से अधिक लोगों की मौत हो गई है. करीब 200 लोगों को अस्पताल में भर्ती करवाया गया है. घटना रात करीब 2.30 बजे हुई फिलहाल, पांच गांव खाली करा लिए गए. सैकड़ों लोग सिर दर्द, उल्टी और सांस लेने में तकलीफ के साथ अस्पताल पहुंच रहे हैं|

1500-2000 बेड की व्यवस्था कर ली है
पहले से सतर्क होते हुये विशाखापट्टनम में इमरजेंसी के लिए 1500-2000 बेड की व्यवस्था कर ली है. विशाखापट्टनम नगर निगम के विशाखापट्टनम नगर निगम के कमिश्नर श्रीजना गुम्मल्ला ने कहा कि शुरुआती रिपोर्ट के अनुसार पीवीसी या स्टाइरीन गैस का रिसाव हुआ है. गुरुवार तड़के आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम में लोगों की नींद एक अजीब बदबू के साथ खुली। अपने-अपने घरों के अंदर सोए लोगों के लिए अचानक सांस लेना दूभर होने लगा इससे पहले कि लोग कुछ समझ पाते गैस ने लोंगो की जान लेने लगी…
प्रशासन की ओर से इलाके में राहत का काम जारी है। स्थानीय पुलिस के साथ एनडीआरएफ की टीम भी मौके पर पहुंच चुकी है और लोगों को प्रभावित इलाके से दूर सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील कर रही है। प्रशासन का दावा है कि स्थिति पर जल्द नियंत्रण की उम्मीद है, लेकिन पहले ही कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण से परेशान लोगों पर इसका असर कब तक बना रहेगा, यह बताना मुश्किल है।

आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम में गैस रिसाव की घटना
इस घटना की गंभीरता को समझते हुये प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) की एक बैठक बुलाई. गृह मंत्री अमित शाह ने आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में रसायनिक संयंत्र से गैस रिसाव को परेशान करने वाला बताया और कहा कि केंद्र सरकार स्थित पर पैनी निगाह रख रही है… कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम में गैस रिसाव की घटना पर दुख जताते हुए पार्टी के स्थानीय नेताओं एवं कार्यकर्ताओं का आह्वान किया कि वे प्रभावित लोगों की हरसंभव मदद करें|
ग्रेटर विशाखापट्टनम नगर निगम ने इन स्थानों के आसपास रहने वाले लोगों से आग्रह किया है कि वे सुरक्षा एहतियात बरतते हुए घरों से बाहर नहीं निकलें… “अपनी नाक और मुंह को ढकने के लिए कृपया गीले कपड़े को मास्क की तरह इस्तेमाल करें|
रिपोर्ट के अनुसार आखिर ये पीवीसी या स्टाइरीन गैस है…. समझिये कि स्टाइरीन है क्या… – ? इसका क्या उपयोग है? इसके एक्सपोजर से शरीर पर क्या असर पड़ता है –
यूएस नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के अनुसार स्टाइरीन एक ज्वलनशील तरल है जिसका उपयोग पॉलीस्टीरिन प्लास्टिक, फाइबरग्लास, रबर और लेटेक्स बनाने के लिए किया जाता है। यह कुछ फलों, सब्जियों, मीट, नट्स और पेय पदार्थों में स्वाभाविक रूप से होता है। स्टाइरीन का उपयोग इन चीजों में होता है: इन्सुलेशन, पाइप्स, ऑटोमोबाइल पार्ट, प्रिंटिंग कार्टिज और कॉपी मशीन टोनर, फूड कंटेनर्स, पैकेजिंग, कारपेट बैकिंग, लगेज, जूते, खिलौने, फ्लोर वैक्स और पॉलिश। सिगरेट व गाडि़यों से निकलने वाले धुएं में भी स्टाइरीन होता है।
स्टाइरीन के संपर्क में आने पर शरीर पर छोटे अंतराल के लिये पड़ने वाला प्रभाव जैसे आंखों, त्वचा और नाक में जलन, गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल प्रभाव, सांस लेने में दिक्कत हो सकती है… स्टाइरीन के लंबे समय तक संपर्क के कारण केंद्रीय तंत्रिका तंत्र और गुर्दे पर असर, सिर दर्द, डिप्रेशन, थकान और कमजोरी, बहरापन, संतुलन और एकाग्रता की समस्याएं, कैंसर तक हो सकता है|
डॉक्टर के मुताबिक
यह गैस बाद में दिमाग और रीढ़ की हड्डी पर भी असर डालती है। इस वजह से गैस के संपर्क में आने वाले स्थानीय लोग सड़कों पर इधर-उधर गश खाकर गिर पड़े…कुछ डॉक्टरों ने बताया कि स्टीरीन न्यूरो-टॉक्सिन गैस है, जिसके संपर्क में आने के बाद सांस लेने में दिक्कत होती है। इससे 10 मिनट के भीतर प्रभावित व्यक्ति की मौत हो सकती है।
विशाखापट्टनम की ही तरह भोपाल की यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री से जहरीली गैस का रिसाव हुआ था
विशाखापट्टनम में जहरीली गैस के रिसाव की इस घटना ने करीब 36 साल पहले हुई ऐसी ही एक दुर्घटना की यादें ताजा कर दीं। विश्व की सबसे भीषण औद्योगिक दुर्घटनाओं में शामिल यह हादसा साल 1984 में 2 दिसंबर की रात को हुआ था। विशाखापट्टनम की ही तरह भोपाल की यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री से जहरीली गैस का रिसाव हुआ था जिसका असर आज भी वहां के लोगों पर स्पष्ट देखा जा सकता है। हालांकि, यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री में हुआ हादसा विशाखापट्टनम में हुए हादसे से कहीं ज्यादा डराने वाली और घातक थी…. मिथाइल आइसोसाइनाइड के रिसाव से करीब 3,000 लोगों की मौत हो गई थी और लगभग 1.02 लाख लोग प्रभावित हुए थे। मौत का वास्तविक आंकड़ा 15 हजार से ज्यादा था, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में 3787 मौतें ही दर्ज हैं। इस हादसे से प्रभावित लोग अब भी कैंसर, ट्यूमर, सांस और फेफड़ों की समस्या जैसी बीमारियों से ग्रसित हैं।
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