आंध्र प्रदेश के दुगाराजपट्टनम में एक आधुनिक ग्रीनफील्ड शिपयार्ड विकसित किया जाएगा. इसके लिए रक्षा क्षेत्र की सरकारी कंपनी मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) और नेशनल शिपबिल्डिंग एंड हेवी इंडस्ट्रीज पार्क-आंध्र प्रदेश (NSHIP-AP) के बीच 18 सितंबर 2026 को ऐतिहासिक करार हुआ है. यह समझौता मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू की मौजूदगी में संपन्न हुआ, जिसके तहत अगले 5 से 7 वर्षों में करीब 15,000 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा और लगभग 45 हजार लोगों को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार मिलने का अनुमान है.
⚓ 2. सालाना 12 लाख ग्रॉस टनेज की होगी क्षमता, एलएनजी और कंटेनर जहाजों समेत कई कमर्शियल वेसल होंगे तैयार
दुगाराजपट्टनम में बनने वाले इस अत्याधुनिक शिपयार्ड की डिजाइन क्षमता सालाना 12 लाख ग्रॉस टनेज होगी, जिसे भविष्य में बाजार की मांग के अनुसार और बढ़ाया जा सकेगा. इस परियोजना के तहत टैंकर, बल्क कैरियर, कंटेनर जहाज, एलएनजी (LNG) कैरियर और अन्य विशेष प्रकार के बड़े व्यावसायिक जहाजों का निर्माण किया जाएगा. इसके अलावा, ₹29,254 करोड़ की लागत से बनने वाले इस शिपबिल्डिंग और पोर्ट क्लस्टर से राज्य में मरीन इंजीनियरिंग का एक मजबूत इकोसिस्टम तैयार होगा.
🇮🇳 3. ग्लोबल शिपबिल्डिंग हब बनने की ओर भारत कदम, युद्धपोतों के बाद अब कमर्शियल जहाजों के निर्माण में उतरेगी MDL
अब तक भारतीय नौसेना के लिए युद्धपोत और पनडुब्बियां बनाने के लिए पहचानी जाने वाली कंपनी MDL इस परियोजना के जरिए घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार के लिए कमर्शियल जहाजों का निर्माण करेगी. यह पूरी योजना केंद्र सरकार की शिपबिल्डिंग डेवलपमेंट स्कीम (SbDS) और ‘मैरीटाइम अमृत काल विजन 2047’ के अनुरूप है. मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने विश्वास जताया है कि आंध्र प्रदेश की लंबी तटरेखा और इस मेगा प्रोजेक्ट के जरिए भारत वर्ष 2047 तक दुनिया के टॉप 5 जहाज निर्माण देशों में शामिल होने का अपना लक्ष्य हासिल कर लेगा.


