गोपाल राय का जन्म 10 मई 1975 को ग्राम गोबरीडीह, निकट सिपाह इब्राहिमाबाद बाजार, थाना मधुबन, जिला महु (उ।प्र।) में एक किसान परिवार में हुआ। आपने गृह जनपद से ही प्रारंभिक शिक्षा, प्राइमरी पाठशाला गोबरीडीह, मीडिल शिक्षा, किसान लघु माध्यमिक विद्यालय मुरारपुर, हाईस्कूल व इंटरमीडिएट की शिक्षा, तरुण इंटर कालेज कुंडा से प्राप्त की।
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के अधीन दिल्ली सरकार में गोपाल राय वर्तमान में रोजगार, विकास, श्रम, सामान्य प्रशासन और सिंचाई मंत्री हैं। यह एक आम सामाजिक कार्यकर्ता और आम आदमी पार्टी की राजनीतिक मामलों की समिति के सदस्य भी हैं। गोपाल राय ने 1998 में लखनऊ विश्वविद्यालय से समाजशास्त्र में स्नातकोत्तर पूरा किया है। साथ ही इन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के छात्र विंग ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन के साथ 1992 में राजनीतिक कॅरियर की शुरूआत की ।
रोचक बाते
लखनऊ में कॉलेज के दिनों में गोपाल जी को 18 जनवरी1999 गोली मार दी गई थी, लखनऊ के मेडीकल कॉलेज मे कुछ महीनो तक इलाज चला जिसकी वजह से गोपाल राय को आंशिक रूप से लकवा की बीमारी हो गई थी।कुछ दिनों बाद गोपाल जी और दो अन्य सदस्य ने 10-24 जनवरी 2014 तक अभियान चलाया और आम आदमी” पार्टी का काम संभाला। ताकि अन्य राजनीतिक समूहों के फंड संग्रह, सहयोग और प्रबंधन को संभाला जा सके।
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2013 में गोपाल जी बाबारपुर निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव में 25723 वोट बंटौर कर हार गए और दिल्ली विधायी विधानसभा चुनावों में तीसरे स्थान पर रहे। इसके बाद 2015 में गोपाल राय को दिल्ली विधानसभा चुनाव में बाबरपुर निर्वाचन क्षेत्र से विधायक के रूप में निर्वाचित किया गया था और इन्हें परिवहन और श्रम मंत्रालय सौंपा गयाऔर गोली लग जाने के बाद भी गोपाल राय ने बड़े अच्छे तरीके से राजनीतिक को संभाला ।
2015 गोपाल जी दिल्ली विधानसभा चुनाव में बाबरपुर निर्वाचन क्षेत्र से विधायक बने। इन्हें परिवहन व श्रम मंत्रालय सौपा गया।
इतना ही नहीं यह आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य भी हैं।दिल्ली सरकार में गोपाल राय को रोजगार, विकास, श्रम, सामान्य प्रशासन और सिंचाई मंत्रालय दिए गए है
गोपाल राय, आम आदमी पार्टी

गोपाल राय लंबे समय तक छात्र आंदोलनों से जुड़े रहे। वह वामपंथी छात्र संगठन आइसा में भी रहे हैं। छात्र आंदोलनों से जुड़ाव की वजह से एक बार उन पर बदमाशों ने हमला भी किया। वह बच गए लेकिन शरीर में कई जगह चोटें आईं। जनलोकपाल आंदोलन मे वह शुरू से ही जुड़े रहे हैं। जंतर मंतर पर वह भी दो बार अनशन कर चुके हैं।


