राष्ट्रमंडल खेलों में कांस्य पदक जीतने वाली महिला (Wrestler Divya) पहलवान दिव्या काकरान और दिल्ली सरकार के बीच विवाद गहराता जा रहा है। दिव्या ने गुरुवार को प्रेस वार्ता कर कहा कि मैं 2001 में दिल्ली आई थी और 2006 में पहलवानी शुरू की थी। पूर्वी दिल्ली के गोकुलपुरी में किराए के घर में रही। 2017 तक मैं दिल्ली के लिए 58 पदक जीत चुकी थी।
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Wrestler Divya – दिव्या ने कहा कि साल 2017 में वह खुद दिल्ली सरकार के पास मिलने गई थीं। मैंने मदद मांगी तो सरकार की ओर से कहा गया कि लिख कर दीजिए। मैंने यह भी किया लेकिन फिर भी उनकी ओर से कोई फोन-मेल नहीं आया। इसके बाद 2017 के आखिर से मैं यूपी की ओर से खेलने लगी।दिव्या ने बताया कि मुझे यूपी से आजीवन 20 हजार रुपए पेंशन प्रोत्साहन मिला है। दिल्ली सरकार से मेरी कोई दुश्मनी नहीं है। लेकिन अगर वो बाकी खिलाड़ियों की मदद करते हैं तो मेरी क्यों नहीं की।
दिव्या ने जब राष्ट्रमंडल खेलों में कांस्य पदक जीता तो दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट कर उन्हें बधाई दी। इसपर दिव्या ने कहा कि मैं 20 सालों से दिल्ली में रह रही हूं लेकिन सरकार ने मेरी मदद नहीं की। दिव्या के ट्वीट के बाद सोशल मीडिया पर यह मुद्दा चर्चा का विषय बना हुआ है।पहलवान दिव्या काकरान के आरोपों का जवाब देते हुए दिल्ली सरकार ने कहा है कि भारत के लिए मेडल लाने वाले सभी खिलाड़ियों को दिल्ली सरकार प्रमोट करती है। दिव्या काकरान की ओर से मदद का कभी आवेदन ही नहीं किया गया।
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सरकार के मुताबिक, दिल्ली की तरफ से खेलने वाले खिलाड़ियों को दिल्ली सरकार कई तरह की स्कीम के तहत सम्मानित करती है। जैसे मिशन एक्सीलेंस, प्ले एंड ग्रो। सरकार की ओर से कहा गया कि साल 2015-16 से हजारों खिलाड़ियों को करोड़ों रुपये की मदद दी जा चुकी है। जो खिलाड़ी सहायता के लिए आवेदन करते हैं उन्हें हर साल सहायता मिल रही है।दिल्ली सरकार की ओर से दिव्या को 2017 तक खेल सहायता दी जाती रही है। उसके बाद वो उत्तर प्रदेश की तरफ से खेलने लगी। कुश्ती संघ ने भी कहा है कि दिव्या 2017 के बाद से उत्तर प्रदेश की ओर से खेल रहीं हैं।

