
आज विश्व वन्यजीव दिवस है। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वन्यजीवों की रक्षा में जुटे सभी लोगों का आभार व्यक्त किया है। उन्होंने ट्वीट करके कहा कि शेर, बाघ और तेंदुओं की संख्या में इजाफा हुआ है। हमें अपने वनों के साथ-साथ वन्यजीवों के लिए सुरक्षित निवास स्थल को सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास करने चाहिए। जंगल और वन्यजीवों के संरक्षण की दिशा में काम करते रहना चाहिए।
https://twitter.com/narendramodi/status/1366962781023477760?s=20 वहीं, केंद्रीय वन, पर्यावरण व जलवायु परिवर्तन मंत्री प्रकाश जावडेकर ने कहा कि देश के वनों में जल्दी ही चीतों की वापसी होगी। इस दिशा में और भी प्रयास किए जा रहे हैं। साल 1952 से देश के वनों से चीते गायब हो गए हैं। उन्होंने ट्वीट करके कहा कि देश वन्यजीवों के संरक्षण और उनकी जैव-विविधता बनाए रखने की दिशा में प्रयासरत है। विश्व की 70 प्रतिशत बाघों की संख्या, 70 प्रतिशत एशियाई शेर और 60 प्रतिशत तेंदुओं की संख्या भारत में है। जल्दी ही चीतों की भी वापसी होने जा रही है।

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https://twitter.com/PrakashJavdekar/status/1366958837983416332?s=20 क्यों मनाया जाता है विश्व वन्यजीव दिवस विश्वभर में वन्यजीवों की सुरक्षा तथा वनस्पतियों की लुप्त प्रजातियों के प्रति लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से 3 मार्च को हर वर्ष वन्यजीव दिवस मनाया जाता है। जानवरों और पेड़-पौधों की ऐसे दुर्दशा को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 20 दिसंबर 2013 को 68वें सत्र में 03 मार्च के दिन को ‘विश्व वन्यजीव दिवस’ के रूप में अपनाए जाने की घोषणा की। तीन मार्च को विलुप्तप्राय वन्यजीव और वनस्पति के व्यापार पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन को स्वीकृत किया गया था। वन्य जीवों को विलुप्त होने से रोकने के लिए पहली बार साल 1872 में जंगली हाथी संरक्षण अधिनियम (वाइल्ड एलीफेंट प्रिजर्वेशन एक्ट) पारित हुआ था।
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