हिंदू धर्म में यशोदा जयंती बड़ी पावन और विशेष मानी गई है. यशोदा जयंती मां यशोदा के जन्मदिन के रूप में मनाई जाती है. मां यशोदा ने भगवान श्री कृष्ण का पालन-पोषण किया था. यशोदा जंयती (what to do on yashoda jayanti) के दिन व्रत के साथ ही मां यशोदा और भगवान श्री कृष्ण की पूजा का विधान है. यशोदा जयंती का व्रत महिलाओं के लिए बड़ा ही विशेष माना जाता है.

what to do on yashoda jayanti – हिंदू मान्यताओं के अनुसार, यशोदा जंयती के दिन व्रत और पूजन करने से महिलाओं को मातृत्व का आशीर्वाद मिलता है. इस दिन व्रत और पूजन करने से संतान की उम्र लंबी होती है. यशोदा जयंती के दिन व्रत और पूजन से जीवन के दुख दूर होते हैं और सुख-शांति का वास बना रहता है. हिंदू धर्म शास्त्रों में बताया गया है कि इस दिन क्या करना और क्या नहीं करना चाहिए. साथ ही ये भी बताया गया है कि ये व्रत कैसे पूरा होता है. आइए जानते हैं.

यशोदा जयंती कब है ?

हिंदू पंचांग के अनुसार, यशोदा जयंती फाल्गुन महीने की कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाई जाती है. इस साल फाल्गुन महीने की कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि की 18 फरवरी को तड़के सुबह 4 बजकर 53 मिनट पर शुरू होगी. वहीं इस तिथि का समापन 19 फरवरी को सुबह 7 बजकर 32 मिनट पर होगा. ऐसे में इस साल यशोदा जयंती 18 फरवरी को मनाई जाएगी. इसी दिन इसका व्रत भी रखा जाएगा.

यशोदा जंयती पर क्या करें ?
  • यशोदा जयंती के दिन सुबह उठकर स्नान करना चाहिए. फिर साफ वस्त्र पहनने चाहिए.
  • इस दिन व्रत रखने से पहले व्रत का सकंल्प लेना आवश्यक माना जाता है.
  • यशोदा जयंती के दिन व्रत रखने से पहले तुलसी पूजन करना चाहिए.
  • फिर घर के मंदिर में माता यशोदा और भगवान कृष्ण की प्रतिमा या तस्वीर रखनी चाहिए.
  • माता यशोदा और भगवान कृष्ण सामने दीपक जलाना चाहिए.
  • विधि पूर्वक माता माता यशोदा और भगवान कृष्ण का पूजन करना चाहिए.
  • पूरा दिन व्रत रखना चाहिए. शाम के समय पूजा के बाद फलाहार करना चाहिए.
यशोदा जंयती पर क्या न करें ?
  • यशोदा जयंती के दिन व्रत में भूलकर भी अन्न नहीं खाना चाहिए.
  • इस दिन तामसिक भोजन और शराब का सेवन नहीं करना चाहिए.
  • इस दिन किसी को भी अपशब्द नहीं कहने चाहिए.
  • इस दिन झूठ नहीं बोलना चाहिए.
कैसे पूरा होता है यशोदा जयंती का व्रत

यशोदा जयंती के दिन पूजा-पाठ करना चाहिए. व्रत में ताजे फल, दूध, दही, नारियल पानी, कट्टू के आटे से बने फलहारी भोजन, मखाने, खीरा, कम घी में बने आलू, साबूदाना की खिचड़ी या खीर और सवां के चावल की खीर या खिचड़ी खाई जा सकती है. शाम के समय विधि-पूर्वक माता यशोदा और भगवान श्री कृष्ण का पूजन करना चाहिए. इसके बाद फलाहार करना चाहिए. अगली सुबह स्नान के बाद पूजन करते व्रत का पारण करना चाहिए. इस तरह से यशोदा जयंती का व्रत पूरा हो जाता है.

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