हिमाचल प्रदेश के मंडी समेत कई जिलों में बाढ़ कहर बरपा रही है, जिसके चलते लाखों लोग प्रभावित हुए हैं. कुदरत के कहर का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 20 जून को मानसून ने एंट्री मारी थी, जिसके बाद से मरने वालों की संख्या 78 हो गई है. अकेले मंडी जिले में 14 लोगों की मौत हुई है. अनुमान लगाया गया कि बाढ़ की वजह से 572 करोड़ रुपए से अधिक का नुकसान हुआ है. बाढ़ से बिगड़े हालात का जायजा लेने के लिए मंडी से भारतीय जनता पार्टी की सांसद कंगना रनौत भी पहुंचीं, जहां उन्होंने पीड़ितों से बातचीत की. इस दौरान मंडी सांसद ने फंड न होने की बात कही.
सांसद अपने क्षेत्र में क्या-क्या कर सकता है?
1993 में शुरू की गई सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना (एमपीएलएडीएस) के तहत हर सांसद को अपने संसदीय क्षेत्र में विकास के लिए हर साल 5 करोड़ रुपए दिए जाते हैं. इस योजना का संचालन सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) की ओर से किया जाता है. एमपीएलएडीएस के तहत सांसद निधि को जिले में संबंधित कार्यान्वयन एजेंसियों के जरिए भेजा जाता है.
what can an MP do – सांसद MPLADS के तहत अपने क्षेत्र में डेवलपमेंट प्रोजेक्ट की सिफारिश कर सकता है. इसमें सड़कें, स्कूल, अस्पताल, पेयजल सुविधाएं और अन्य बुनियादी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट शामिल हो सकते हैं. इसके अलावा, सांसद जनता की समस्याओं को संसद में उठाता है और सरकार से उनके समाधान के लिए अपील करता है. साथ ही साथ वह अपने क्षेत्र में सांस्कृतिक और सामाजिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए काम कर सकता है. इसके अलावा प्राकृतिक आपदाओं के समय अपने क्षेत्र के लोगों को राहत प्रदान करने में मदद कर सकता है. बाढ़, सूखा, महामारी जैसी स्थिति में राहत सामग्री, राशन, मेडिकल सहायता, राहत शिविर लगाने के साथ-साथ और सरकार से राहत पैकेज की मांग कर सकता है.
