जबलपुर : मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के लिए ई-अटेंडेंस की अनिवार्यता को चुनौती दी गई. याचिका की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता शिक्षकों की तरफ से हलफनामा पेश किया गया. इसमें (problems in e attendance) ई-अटेंडेंस दर्ज कराने में आने वाली दिक्कतों की जानकारी दी गई. जस्टिस एमएस भट्टी की एकलपीठ ने शिक्षकों को आने वाली दिक्कतों से संबंध में सरकार से शपथ-पत्र के साथ ही जवाब प्रस्तुत करने के आदेश जारी किये हैं.
डेटा प्रोटेक्शन एक्ट 2023 का जिक्र
जबलपुर निवासी मुकेश सिंह वरकड़े, सतना के सत्येंद्र तिवारी सहित प्रदेश के अलग-अलग जिलों के 27 शिक्षकों ने याचिका दायर कर ई-अटेंडेंस को चुनौती दी है. याचिका में कहा गया है “शिक्षकों को ई-अटेंडेंस के लिए बने शिक्षक एप के जरिए उपस्थित दर्ज कराने में बहुत सी समस्याओं को सामना करना पड़ रहा है. डेटा प्रोटेक्शन एक्ट 2023 के के तहत शिक्षकों का पर्सनल मोबाइल व्यक्तिगत उपयोग के लिए है. मोबाइल से बैंक खाता लिंक है.”
शिक्षकों ने सायबर फ्रॉड की आशंका जताई
शिक्षा विभाग ने जून 2025 से शिक्षक एप को शिक्षकों के पर्सनल मोबाइल पर डाउनलोड कर, दिनभर लोकेशन ओर जीपीएस ऑन करते हुए उपस्थित दर्ज कराने के आदेश जारी किए थे. पर्सनल मोबाइल पर कोई भी एप डाउनलोड करने तथा उनके पर्सनल मोबाइल पर डेटा, सुरक्षा की गारंटी का कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं किया है. सायबर फ्रॉड की घटनाओं में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है. लोकेशन ऑनलाइन करने पर शिक्षकों को सुरक्षा की बड़ी चिंता है.”
बायोमेट्रिक मशीन पर शिक्षक सहमत
याचिका में कहा गया है “कई शिक्षकों के पास अच्छा स्मार्ट फोन नहीं है और प्रतिमाह डाटा पैक खरीदना, प्रतिदिन मोबाइल की बैटरी चार्ज रखना, स्कूल में नेटवर्क कनेक्टिविटी नहीं होने की भी समस्याएं हैं. एप में सर्वर व चेहरा मिलान की भी समस्याएं हैं.” याचिका में राहत चाही गयी थी “बायोमेट्रिक मशीन से या पूर्व की भांति कर्मचारी रजिस्टर में (problems in e attendance) उपस्थित दर्ज कराई जाए.” पिछली सुनवाई के दौरान एकलपीठ ने ई-अटेंडेंस में आने वाली दिक्कतों के संबंध में याचिकाकर्ताओं को हलफनामा प्रस्तुत करने के आदेश जारी किये थे.
