पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की पहली कैबिनेट मीटिंग में सर्जिकल स्ट्राइक हुई. राज्य सरकार ने रिटायरमेंट के बाद भी काम कर रहे सरकारी अधिकारियों की नौकरी खत्म करने का फैसला किया. इससे पहले, पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कई इलाकों में रिटायरमेंट के बाद भी अधिकारियों को काम करते रहने की छूट दी थी. हालांकि (leave of serving officers after retirement) नए मुख्यमंत्री ने कहा कि इस बार ऐसा नहीं होगा. मंत्रिमंडल की बैठक के बाद शुभेंदु अधिकारी ने निर्देश दिया कि अलग-अलग बोर्ड, ऑर्गनाइजेशन और पब्लिक सेक्टर यूनिट के नॉमिनेटेड मेंबर, डायरेक्टर और चेयरपर्सन का टर्म तुरंत खत्म होना चाहिए.
📄 60 साल से ऊपर वालों पर एक्शन
सभी डिपार्टमेंट के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी, प्रिंसिपल सेक्रेटरी और सेक्रेटरी को लेटर भेजे गए हैं. 60 साल की उम्र के बाद दोबारा अपॉइंट हुए या जिनका सर्विस टर्म बढ़ाया गया है, उनके मामले में भी एक्शन लेने के निर्देश दिए गए हैं. राज्य सरकार के अलग-अलग डिपार्टमेंट में इस निर्देश को लागू करने के निर्देश दिए गए हैं. असल में, राज्य के अलग-अलग डिपार्टमेंट में 900 से ज्यादा एडवाइजर और OSD काम कर रहे थे. उन्हें उस समय की ममता बनर्जी सरकार ने दोबारा अपॉइंट किया था.
🛡️ ‘सिर ऊंचा करके काम करें’
सोमवार को शुभेंदु अधिकारी ने ब्यूरोक्रेट्स को खास निर्देश भी दिए. उन्होंने कहा, सिर ऊंचा करके काम करें. अगर कोई दिक्कत हो तो सीधे मुझे बताएं. डरे मत. अलग से मोटिवेशन की जरूरत नहीं है. उन्होंने आगे कहा, सरकार का काम सरकार की तरह करें. जिस तरह सब सरकारी काम करते हैं, उसी तरह सरकारी काम का (leave of serving officers after retirement) सम्मान होना चाहिए. उन्होंने कहा कि पिछले पंद्रह सालों में सरकारी काम में ‘अनुप्रेरणा’ शब्द का बार-बार इस्तेमाल हुआ है, लेकिन अब सरकारी काम में किसी को खास अहमियत देने की जरूरत नहीं है.


