वाशिंगटन/तेहरान: अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुए 14 सूत्रीय समझौता (MoU) पर अब काले बादल मंडराने लगे हैं। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने परमाणु निरीक्षण (Nuclear Inspection) से साफ इनकार कर दिया है, जिसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि ईरान IAEA (अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी) को निरीक्षण करने की अनुमति नहीं देता है, तो बातचीत को रद्द कर दिया जाएगा।
🚀 मिसाइलों पर कोई समझौता नहीं: ईरानी राष्ट्रपति
ईरानी राष्ट्रपति पेजेशकियान ने अपने देश के रुख को स्पष्ट करते हुए कहा है कि ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम पर कोई बातचीत नहीं होगी। उनके अनुसार, यह मिसाइल क्षमता ईरान की आत्मरक्षा के लिए अनिवार्य है। उन्होंने तर्क दिया कि यदि ईरान के पास यह शक्ति नहीं होती, तो गाजा की तरह इजराइल उसे भी निशाना बना सकता था। उन्होंने पश्चिमी देशों की ‘मानवाधिकार नीति’ के दोहरे मापदंडों पर भी कड़े सवाल उठाए।
⚖️ ट्रंप और मध्यस्थों का पक्ष
इस बीच, डोनाल्ड ट्रंप ने पत्रकारों से बातचीत में दावा किया कि आंतरिक वार्ता के दौरान ईरान पहले ही निरीक्षण के लिए राजी हो चुका है। ट्रंप ने कहा, “जो लोग इसका विरोध कर रहे हैं, वे गलत हैं। ईरान 100 फीसदी जांच के लिए तैयार है।” दूसरी ओर, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, जिन्होंने इस मामले में मध्यस्थता की थी, का कहना है कि मिसाइल प्रोग्राम कभी भी अमेरिका-ईरान समझौते का हिस्सा नहीं था और न ही इस पर कोई चर्चा हुई थी।
📜 14 सूत्रीय MoU और भविष्य की राह
दोनों देशों के बीच हाल ही में 14 सूत्रीय MoU पर सहमति बनी थी, जिसका उद्देश्य वर्षों से चले आ रहे तनाव को समाप्त करना है। स्विट्जरलैंड में हुई उच्च-स्तरीय वार्ता में 60 दिनों के भीतर एक ‘अंतिम पूर्ण समझौते’ का रोडमैप तैयार करने के लिए एक विशेष कमेटी का गठन किया गया है। अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या ईरान और अमेरिका निरीक्षण के मुद्दे पर आपसी सहमति बना पाते हैं या यह शांति समझौता बीच में ही दम तोड़ देगा।


