UP Big News: प्रदेश के 69 जिला पंचायत अध्यक्षों का कार्यकाल 13 जनवरी की रात 12 बजे से खत्म होगा। इनके साथ इन जिला पंचायतों में जिलाधिकारी प्रशासक बन जाएंगे। पांच जिला पंचायतों का कार्यकाल अगले 3 महीनों में अलग-अलग तारीखों में पूरा होगा। उसके बाद उन जिलों की जिला पंचायतों में वहां के जिलाधिकारी प्रशासन का कार्यभार संभालेंगे।
पंचायती राज विभाग के अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह ने मंगलवार की रात इस बाबत आदेश जारी किया। वैसे जिला पंचायत अध्यक्षों का कार्यकाल काफी सियासी उठापटक वाला रहा है। राज्य निर्वाचन आयोग से मिले आंकड़ों के अनुसार 2017 में जिला पंचायत अध्यक्ष के खिलाफ 5 अविश्वास प्रस्ताव आए और 6 जिला पंचायत अध्यक्षों को त्यागपत्र देने पड़े। वर्ष 2018 में दो जिला पंचायत अध्यक्ष के त्यागपत्र के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव आए और 7 जिला पंचायत अध्यक्षों को त्यागपत्र देने पड़े। 2019 में एक जिला पंचायत अध्यक्ष ने त्यागपत्र दिया और तीन के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाए गए। इसके बाद आयोग को इन पदों पर उपचुनाव करवाने पड़े।
UP Big News: बताते चलें कि जिला पंचायत अध्यक्ष, जिला पंचायत के सीधे जनता से चुने गए सदस्यों के द्वारा ही चुने जाते हैं।ऐसे में सदस्यों की खरीद-फरोख्त से यह चुनाव होते हैं। जिसमें धनबल,बाहुबल का खूब इस्तेमाल होता है। इसके बाद समय-समय पर सदस्यों की गुटबाजी और सियासी चालों की वजह से जिला पंचायत अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाए जाते रहे हैं या दबाव बनाकर में त्याग पत्र देने के लिए विवश किया जाता है इसी वजह से जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव सीधे जनता से करवाने की मांग बार-बार होती है।
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चुनाव जनता से कराने के लिए संविधान में संशोधन जरूरी
भाजपा के पंचायती राज प्रकोष्ठ के पूर्व सह संयोजक रत्नेश मौर्य का कहना है कि पंचायत अध्यक्ष के चुनाव सीधे जनता से ही करवाने के लिए संविधान में संशोधन करवाया जाना चाहिए। मौर्य इस बाबत पहले ही प्रदेश सरकार को पत्र लिख चुके हैं। राष्ट्रीय पंचायती राज ग्राम प्रधान संगठन के प्रवक्ता ललित शर्मा भी मानते हैं कि जिला पंचायत और क्षेत्र पंचायत अध्यक्ष के चुनाव सीधे जनता से होंगे तो इससे सदस्यों की खरीद-फरोख्त, धनबल, बाहुबल के अनुचित प्रयोग व भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा।
