the entire game overturned : नेपाल में सिर्फ दो दिन चले युवाओं के आंदोलन ने पूर्व प्रधानमंत्री केपी ओली को सत्ता से बाहर का रास्ता दिखा दिया. नेपाल में इस हफ्ते जो भी देखने को मिला, इसका असर सिर्फ नेपाल की राजनीति तक ही सीमित नहीं है. इसका असर पूरी एशियाई राजनीति पर पड़ा है क्योंकि ओली को चीन का सबसे बड़ा करीबी माना जाता था.

उनके हटने से यह माना जा रहा है कि अमेरिका ने एक बड़ा गेम खेला है और चीन को सीधे-सीधे झटका दिया है. नेपाल हमेशा से भारत और चीन के बीच संतुलन बनाकर चलता आया है. लेकिन ओली के कार्यकाल में नेपाल का झुकाव चीन की ओर ज्यादा दिखने लगा था. उन्होंने बीजिंग की “बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव” को बढ़ावा दिया, यहां तक कि चीन की विजय दिवस परेड में भी शामिल हुए. यह सब अमेरिका को खटक रहा था.

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मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका ने इस साल नेपाल में मिलेनियम चैलेंज कॉम्पैक्ट (MCC) को फिर से ज़िंदा कर दिया था. यह प्रोजेक्ट करीब 500 मिलियन डॉलर की मदद के साथ ऊर्जा और सड़क ढांचे को मजबूत करने के लिए है. इसे चीन की “बेल्ट एंड रोड” के सीधे टक्कर का प्रोजेक्ट माना गया. इसलिए विश्लेषक कहते हैं कि ओली के खिलाफ भड़की नाराज़गी और आंदोलन में अमेरिका की गहरी भूमिका हो सकती है.

the entire game overturned – अब हालात ये हैं कि ओली बाहर हैं और अब अंतरिम प्रधानमंत्री की जिम्मेदारी सुशीला कार्की संभालने जा रही है. कार्की के भारत से अच्छे रिश्ते हैं, उन्होंने बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की है और पीएम मोदी का नाम लेकर आभार भी जताया है. साफ है कि नेपाल की राजनीति अब चीन से थोड़ी दूरी और भारत अमेरिका के करीब जाती दिख रही है.

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