ब्रिटेन आज एक अनजाने खौफ के साये में जी रहा है. वहां के मूल निवासियों को खुद के गुलाम होने का डर सता रहा है. ब्रिटेन के नागरिकों का कहना है कि देश में बढ़ रहे अप्रवासी उनकी आजादी छीन रहे हैं. इसी (Muslims became majority from minority) के खिलाफ लाखों लोग एक साथ लंदन की सड़कों पर उतरे. अप्रवासियों की बढ़ती संख्या के खिलाफ लंदन की सड़कों पर यूनाइट द किंगडम नाम से रैली निकाली गई. गुस्से की इस लहर के पीछे ब्रिटेन के ही मूल नागरिकों की घटती संख्या है.
रिपोर्ट के मुताबिक फिलहाल वहां 73 प्रतिशत आबादी मूल ब्रिटिश नागरिकों की है, जो 2050 तक घटकर 57 प्रतिशत तक रह जाएगी. इस हिसाब से 2063 तक अपने ही देश में ब्रिटेन के मूल निवासी अल्पसंख्यक हो जाएंगे क्योंकि तब उनकी आबादी 50% से कम हो जाएगी.
ब्रिटेन को आज जो डर सता रहा है कुछ वैसा ही हाल लेबनान का था. इस मुल्क में कभी ईसाई बहुसंख्यक थे, जो अब अल्पसंख्यक बन चुके हैं. इनकी जगह मुसलमानों ने ली है. वेस्ट एशिया के इस देश में अब मुसलमान बहुसंख्यक हो गए हैं.
लेबनान वेस्ट एशिया का एक छोटा सा देश है. 1970 के दशक में इजराइल को छोड़कर यह इस क्षेत्र का एकमात्र गैर-मुस्लिम बहुल देश था. वो लोकतांत्रिक देश भी था और यही वह लोकतंत्र था जिसके कारण मुसलमानों ने इस पर कब्जा कर लिया. इसकी सांस्कृतिक विविधता लाजवाब थी.
Muslims became majority from minority – यह मैरोनाइट ईसाइयों का एकमात्र घर था. लेबनान एशिया में बचे हुए आखिरी ग्रीक कैथोलिकों का भी घर था. जैसे ही लेबनान स्वतंत्र हुआ, पड़ोसी इस्लामी देशों ने उस पर आक्रमण कर उसकी डेमोग्राफी में परिवर्तन करके उसे इस्लामी देश बनाने की योजना बना ली.

