5 नवंबर 2000 की वो सुबह जिसने पूरे उत्तर प्रदेश को हिला दिया. सहारनपुर की फ्रेंड्स कॉलोनी की कोठी नंबर-1 आज भी उस खामोशी को समेटे है, जहां तीन बार विधायक रहे, निडर और ईमानदार जननेता निर्भयपाल शर्मा को गोलियों से छलनी कर दिया गया था. इस घटना को 25 साल बीत गए, लेकिन आज भी यह हत्याकांड (painful chapter of politics) सहारनपुर की सियासत के सबसे दर्दनाक अध्यायों में गिना जाता है.

घटना से कुछ घंटे पहले यानी 4 नवंबर की रात को निर्भयपाल शर्मा के करीबी मित्र पत्रकार महेश भार्गव उनसे मिलने पहुंचे थे. निर्भयपाल ने महेश को बताया कि सरसावा क्षेत्र में एक अपराधी बुद्धू काला ने शादी से पहले एक युवती से दुष्कर्म किया है. यह घटना निर्भयपाल शर्मा को भीतर तक हिला गई थी.उसी रात उन्होंने एसएसपी से मिलकर उस अपराधी के एनकाउंटर की मांग की थी.

अपराधियों ने घर पर किया हमला

महेश भार्गव के मुताबिक, यह बात शायद अपराधी तक पहुंच गई और उसने बदला लेने की ठान ली. 5 नवंबर 2000 की तड़के करीब साढ़े तीन बजे हथियारों से लैस हमलावर फ्रेंड्स कॉलोनी की कोठी नंबर-1 में घुस आए. उस रात निर्भयपाल शर्मा का सरकारी गनर अपने घर जा चुका था. घर में केवल उनकी पत्नी प्रकाश कौर मौजूद थीं. हमलावरों की आहट मिलते ही निर्भयपाल शर्मा ने अपनी पत्नी को बाथरूम में छिप जाने और दरवाजा अंदर से बंद करने को कहा. उन्होंने कहा- ‘जब तक मैं ना कहूं, बाहर मत आना’.

45 मिनट लंबा संघर्ष और…

इसके बाद शुरू हुआ 45 मिनट लंबा संघर्ष… एक तरफ हथियारों से लैस हमलावर, दूसरी तरफ अकेला निर्भयपाल शर्मा अपनी लाइसेंसी बंदूक के साथ. उन्होंने दरवाजे पर डटकर जवाबी फायरिंग की. दीवारें गोलियों से छलनी हो गईं, फर्नीचर टूट गया पर निर्भय पीछे नहीं हटे. सबसे हैरानी की बात यह थी कि निर्भयपाल शर्मा की कोठी से पुलिस चौकी और वरिष्ठ अधिकारियों के आवास मात्र कुछ ही मिनटों की दूरी पर थे.

painful chapter of politics – निर्भयपाल शर्मा ने पूरी तरह अकेले मुकाबला किया. उनकी हिम्मत ऐसी थी कि वे घायल होने के बाद भी बदमाशों पर गोली चलाते रहे. लेकिन आखिरकार हमलावरों ने ताबड़तोड़ फायरिंग और कुल्हाड़ियों से वार कर उन्हें मौत के घाट उतार दिया. हमलावर उनकी बंदूक और कीमती घड़ी लूटकर फरार हो गए.

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