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ऐप्स बेशक यूजर्स की सेफ्टी और प्राइवेसी को लेकर बड़े-बड़े दावे करते हैं लेकिन क्या वाकई सारे दावे सच होते हैं? लोगों की सेफ्टी के लिए ऐप में टू स्टेप वेरिफिकेशन फीचर दिया जाता है लेकिन क्या इस फीचर को ऑन करने के बाद आप डिजिटल दुनिया में सेफ हैं?