जबलपुर: ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने देश में चल रहे जेन Z (Gen Z) के आंदोलन को लेकर सरकार को महत्वपूर्ण सलाह दी है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया है कि प्रदर्शनकारियों की जायज मांगों पर तत्काल सकारात्मक रूप से ध्यान दिया जाना चाहिए। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि जेन जी की इस आवाज को उनकी गहरी पीड़ा और एक मासूम पुकार के रूप में देखा जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि यदि इस आंदोलन को दबाने या इसे बेवजह लंबा खींचने का कोई भी प्रयास किया गया, तो देश में एक पूरी तरह से नई राजनीतिक पीढ़ी तैयार हो सकती है।
👶 “जेन जी की सादगी और मासूमियत ने ऐसे बड़े नेताओं से भी दिला दिया इस्तीफा”
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने आगे कहा कि देश में अक्सर यह दावा किया जाता था कि यह एक ऐसी मजबूत सरकार है जिसमें किसी भी मंत्री या नेता से आसानी से इस्तीफा नहीं लिया जा सकता। लेकिन जेन जी की अद्भुत सादगी और मासूमियत ने ऐसी राजनीतिक परिस्थिति पैदा कर दी कि आखिरकार सरकार को झुकना पड़ा और इस्तीफा दिलाना ही पड़ा। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि बड़े-बड़े राजनीतिक दिग्गज और चाणक्य कहे जाने वाले नेता जो काम नहीं करवा पाए, वह इस नई पीढ़ी की सरलता और मासूमियत ने कर दिखाया।
⚖️ “राजनीति के चाणक्य शुद्ध हृदय वाले युवाओं से टकराने से बचें, जायज मांगें हों पूरी”
उन्होंने स्पष्ट किया कि जो लोग खुद को राजनीति के चाणक्य या अत्यधिक चतुर समझते हैं, उन्हें शुद्ध हृदय वाले इन युवाओं से टकराने से बचना चाहिए। शंकराचार्य ने जेन Z के इस प्रदर्शन की तुलना एक छोटे बच्चे के दर्द से करते हुए समझाया कि जैसे किसी बच्चे को कांटा चुभने पर वह अपनी पीड़ा व्यक्त करने के लिए जोर-जोर से चिल्लाता है, ठीक उसी तरह आज की युवा पीढ़ी भी अपनी पीड़ा और असंतोष को व्यक्त कर रही है। इसलिए उनकी सभी न्यायसंगत मांगों को बिना किसी देरी के स्वीकार किया जाना चाहिए।
🎓 छात्र राजनीति और जयप्रकाश नारायण के ऐतिहासिक आंदोलन का किया जिक्र
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने देश के कालेजों और विश्वविद्यालयों में लंबे समय से छात्र संघों के चुनाव व गतिविधियों के निलंबित रहने का भी विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इसी रोक के कारण लंबे समय से नई राजनीतिक प्रतिभाएं आगे नहीं आ पा रही थीं। यदि जेन Z के इस वर्तमान आंदोलन को ज्यादा समय तक और यूं ही चलने दिया गया, तो इससे भविष्य के कई बड़े और नए नेता तैयार हो जाएंगे। उन्होंने महान समाजवादी नेता जयप्रकाश नारायण के ऐतिहासिक आंदोलन का उदाहरण देते हुए याद दिलाया कि उस दौर में भी बड़ी संख्या में ऐसे युवा सामने आए थे, जिन्होंने आगे चलकर केंद्र और राज्यों की सत्ता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उनके मुताबिक, इस नए आंदोलन से भी राजनीतिक नेताओं की एक बड़ी और ऊर्जावान खेप तैयार हो सकती है, और यदि इसे कुचलने की कोशिश हुई तो यह प्रक्रिया और तेज हो जाएगी।
🗳️ चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर उठाए गंभीर सवाल, मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग
अपने संबोधन के अंत में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने देश के प्रमुख संस्थान यानी चुनाव आयोग (Election Commission) की कार्यप्रणाली पर भी तीखे सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि वर्तमान में जिस तरह से पूरी चुनाव प्रक्रिया संचालित की जा रही है, उससे देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था की रक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और उनके अधीनस्थ अन्य चुनाव आयुक्तों के बीच आपसी मतभेदों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि लंबे समय से कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर आयोग के भीतर असहमति की खबरें सामने आती रही हैं। इन तमाम परिस्थितियों का हवाला देते हुए शंकराचार्य ने पुरजोर मांग की कि मुख्य चुनाव आयुक्त को उनके पद से तत्काल हटाया जाए और एक निष्पक्ष लोकतांत्रिक व्यवस्था के तहत नए और योग्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति की जाए।


