शुजालपुर: मध्य प्रदेश के शुजालपुर शहर में गणेश विसर्जन के पावन पर्व पर एक अनोखा और चौंकाने वाला हादसा सामने आया है। यहां शनिवार की रात तेज आवाज और भारी कंपन के साथ डीजे बजने के कुछ ही देर बाद चौबे मार्ग पर स्थित एक पुराने मकान की छत का एक बड़ा हिस्सा अचानक भरभराकर नीचे आ गिरा। यह खतरनाक घटना रात करीब 10:30 बजे की बताई जा रही है, जिससे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। छत का भारी मलबा सीधे कमरे में रखे हुए सामान पर जा गिरा, जिससे घरेलू सामान बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया।
🕒 गनीमत रही कि कमरे में कोई नहीं था मौजूद, मकान मालकिन ने दर्ज कराई शिकायत
सबसे बड़ी राहत की बात यह रही कि जिस वक्त यह कमरा और छत का हिस्सा गिरा, उस समय उस कमरे के भीतर कोई भी व्यक्ति मौजूद नहीं था, अन्यथा एक बड़ा जानलेवा हादसा हो सकता था। पीड़ित मकान मालकिन की लिखित शिकायत पर स्थानीय पुलिस ने तुरंत मामला दर्ज कर लिया है और पूरे मामले की गंभीरता से जांच शुरू कर दी है। यह पूरी घटना चिकित्सा प्रकोष्ठ भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अभिजीत देशमुख के चौबे मार्ग स्थित पैतृक मकान में घटी है। इस मकान में उनकी 75 वर्षीय बुजुर्ग माता शैलजा देशमुख अकेली निवास करती हैं।
💥 सिलेंडर फटने जैसी तेज आवाज से सहमी बुजुर्ग महिला, प्रशासन से की डीजे पर रोक की मांग
घटना के संबंध में जानकारी देते हुए शैलजा देशमुख ने बताया कि शनिवार की रात जब गणेश विसर्जन का जुलूस उनके घर के पास से गुजर रहा था, उस दौरान डीजे की आवाज बेहद तेज और कर्णप्रिय थी। इसी अत्यधिक तेज आवाज के कारण मकान में लगातार तेज थर्राहट और जोरदार कंपन महसूस हो रहा था। कुछ ही पलों बाद एक धमाके जैसी तेज आवाज गूंजी, जिसे सुनकर उन्हें एक पल के लिए ऐसा लगा कि शायद कोई गैस सिलेंडर फट गया है। जब उन्होंने अगली सुबह उजाले में अपने मकान का मुआयना किया, तो एक कमरे की पूरी छत का हिस्सा गिरा हुआ मिला। मलबे के नीचे आने से कमरे का तमाम सामान पूरी तरह बर्बाद हो चुका है। शैलजा ने जिला प्रशासन से कड़ी मांग की है कि शहर में इस तरह तेज आवाज में डीजे बजाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए और ध्वनि विस्तारक यंत्रों के लिए तय नियमों का सख्ती से पालन कराया जाए।
🤝 शांति समिति की बैठक में तय हुई थी डीजे पर पाबंदी, फिर भी उड़ती दिखी धज्जियां
उल्लेखनीय है कि गणेश विसर्जन पर्व के शांतिपूर्ण आयोजन को लेकर स्थानीय एसडीएम अंकिता पाटकर सहित तमाम प्रशासनिक अधिकारियों और विभिन्न उत्सव समितियों के आयोजकों के बीच एक महत्वपूर्ण शांति समिति की बैठक संपन्न हुई थी। उस बैठक में सभी की सहमति से यह निर्णय लिया गया था कि विसर्जन जुलूस के दौरान किसी भी प्रकार का डीजे नहीं बजाया जाएगा। नगर की लगभग 90 प्रतिशत समितियों ने प्रशासन के इस नियम का पूरी तरह पालन भी किया और पारंपरिक ढोल, ताशों व बैंड-बाजे के साथ अपने जुलूस निकाले। हालांकि, इसके बावजूद कुछ स्थानों पर नियमों को ताक पर रखकर डीजे बजाए जाने की शिकायतें सामने आई हैं।
🔍 तकनीकी जांच और भवन की स्थिति के बाद ही स्पष्ट होगा छत गिरने का मुख्य कारण
फिलहाल प्रशासनिक और तकनीकी रूप से यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि छत के गिरने की असली वजह तेज डीजे के साउंड से उत्पन्न हुआ भारी कंपन था या फिर उस पुराने मकान की कमजोर संरचनात्मक (स्ट्रक्चरल) स्थिति। इसके अलावा, घटनास्थल के ठीक पास स्थित एक अन्य होटल के कांच के बड़े शीशे भी तेज आवाज और कंपन के कारण टूटकर नीचे गिरने की बात सामने आई है। इस पूरी घटना के वास्तविक कारणों की वैज्ञानिक व तकनीकी पुष्टि अब भवन की स्थिति की जांच के बाद ही सामने आ सकेगी।


