छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले से एक बेहद दर्दनाक और मानवता को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। गणेशपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) के बाहर समय पर इलाज न मिलने और अस्पताल का गेट बंद होने के कारण एक प्रसूता को मजबूरन गेट के बाहर ही बच्चे को जन्म देना पड़ा। इस अमानवीय लापरवाही के चलते कुछ ही पलों में नवजात शिशु की मौत हो गई। घटना के बाद से आक्रोशित परिजनों और स्थानीय ग्रामीणों ने अस्पताल के बाहर जमकर हंगामा और प्रदर्शन किया है, जिसके बाद प्रशासन ने सख्त कदम उठाते हुए प्रभारी डॉक्टर और एएनएम को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
🚪 रात 11 बजे पहुंचे थे परिजन, खटखटाने के बावजूद किसी ने नहीं खोला गेट
मृतक नवजात के परिजनों ने रोते हुए आरोप लगाया कि पवनपुर तलवापारा की रहने वाली महिला को प्रसव पीड़ा होने पर वे रात करीब 11 बजे उसे लेकर गणेशपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे थे। लेकिन अस्पताल के मुख्य गेट पर ताला लटका हुआ था। परिजन काफी देर तक लगातार गेट खटखटाते रहे और आवाज लगाते रहे, परंतु अंदर से किसी ने भी दरवाजा नहीं खोला। प्रसव पीड़ा अधिक बढ़ने के कारण महिला को अस्पताल के बाहर ही प्रसव कराना पड़ा। जन्म के कुछ ही मिनटों बाद उचित चिकित्सीय सहायता के अभाव में नवजात ने दम तोड़ दिया।
⚖️ सीएमएचओ की त्वरित कार्रवाई: प्रभारी चिकित्सक और एएनएम निलंबित, प्रसूता अस्पताल में भर्ती
सुबह होते ही इस घटना से गुस्साए ग्रामीण और परिजन अस्पताल के गेट पर धरने पर बैठ गए और दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग करने लगे। मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) प्रशांत सिंह ने त्वरित एक्शन लेते हुए गणेशपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी चिकित्सक राजेश पटेल और एएनएम प्रमिला गिरी को निलंबित कर दिया है। साथ ही पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच के लिए एक टीम का गठन कर दिया गया है। पीड़ित महिला की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे बेहतर इलाज के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रामानुजनगर रेफर किया गया है, जहाँ उसका उपचार जारी है।

