रांची : वर्ष 1984 के सिख दंगे के प्रभावितों को मुआवजे और इससे संबंधित क्रिमिनल केस की मॉनिटरिंग के लिए दायर जनहित याचिका पर मंगलवार को झारखंड हाईकोर्ट में हुई सुनवाई (Sikh Riot Case) के दौरान राज्य के गृह सचिव और डीजीपी वर्चुअल मोड में उपस्थित हुए। कोर्ट ने दोनों अधिकारियों से मुआवजे के भुगतान पर राज्य सरकार की ओर से उठाए गए कदम के बारे में पूछा।
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राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि पूरे राज्य में करीब 600 केस दर्ज किए गए थे, इनमें से कई केस में फाइनल फॉर्म दाखिल हो गए हैं। जो केस बचे हैं उनकी मॉनिटरिंग की जा रही है। कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि सिख दंगों के पीड़ितों को जल्द से जल्द मुआवजा भुगतान सुनिश्चित करें। प्रार्थी के अधिवक्ता दिवाकर उपाध्याय ने जनहित याचिका दायर करने वाले सतनाम सिंह गंभीर को सुरक्षा दिलाने का आग्रह कोर्ट से किया, जिस पर कोर्ट ने उन्हें सुरक्षा के संबंध में जमशेदपुर एसएसपी के पास आवेदन देने को कहा।
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Sikh Riot Case – कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई में इस मामले में अपडेटेड रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। अगली सुनवाई जनवरी 2024 में होगी। हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस संजय कुमार मिश्रा की अध्यक्षता वाली खंडपीठ में हुई सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता आशुतोष आनंद ने पक्ष रखा, जबकि हस्तक्षेप कर्ता की ओर से फैसल अल्लाम ने पैरवी की। कोर्ट को बताया गया कि सिख दंगा के कई पीड़ित बीमार हैं।
