हिंदू धर्म शास्त्रों में शनि देव को कर्मों का फल देने वाला ‘न्यायाधीश’ माना गया है। ज्योतिष शास्त्र में शनि नवग्रहों में सबसे महत्वपूर्ण और प्रभावशाली ग्रह हैं। शनि देव की वक्र दृष्टि (टेढ़ी नजर) को लेकर जनमानस में भारी भय रहता है। लोग शनिवार को उन्हें प्रसन्न करने के लिए विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि (Shani Dev’s Curved Vision) शनि की इस टेढ़ी दृष्टि से स्वयं महादेव और भगवान गणेश भी अछूते नहीं रहे थे?
जब महादेव को धारण करना पड़ा पशु योनि का रूप
पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक बार शनि देव ने भगवान शिव को बताया कि अगले दिन उनकी वक्र दृष्टि शिव जी पर पड़ने वाली है। इससे बचने के लिए महादेव ने हाथी का भेष धारण किया और पूरे दिन धरती पर विचरण करते रहे। शाम को जब वे वापस कैलाश लौटे और शनि देव से कहा कि उन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा, तो शनि देव ने मुस्कुराते हुए कहा, “प्रभु! मेरी दृष्टि से कोई नहीं बच सकता। मेरी दृष्टि के प्रभाव से ही आप आज पूरे दिन देव-योनि छोड़कर पशु योनि में रहने को मजबूर हुए।”
गणेश जी पर शनि देव की दृष्टि का प्रभाव
एक अन्य कथा के अनुसार, जब भगवान गणेश का जन्म हुआ, तो शनि देव उन्हें देखने कैलाश आए। माता पार्वती के बार-बार आग्रह करने पर उन्होंने अपनी नजरें नीचे की ओर रखते हुए गणेश जी को देखने का प्रयास किया, लेकिन जैसे ही उनकी दृष्टि गणेश जी पर पड़ी, उनका मस्तक (Shani Dev’s Curved Vision) धड़ से अलग हो गया। इससे दुखी होकर माता पार्वती ने शनि देव को श्राप दिया, जिसके परिणामस्वरूप शनि देव का एक पैर अक्षम (अंग विहीन) हो गया और उनकी चलने की गति धीमी हो गई।


