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    Home » स्कूल नहीं, संकटशाला! जर्जर इमारत की दरारों में फंसा बच्चों का भविष्य

    स्कूल नहीं, संकटशाला! जर्जर इमारत की दरारों में फंसा बच्चों का भविष्य

    July 12, 2025 मध्य प्रदेश 2 Mins Read
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    मध्य प्रदेश में शिक्षा अब सिर्फ किताबों में ही बची है. यहां बच्चे आसमान के नीचे बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं. हालांकि सरकारी दावे हर साल आते हैं, लेकिन हकीकत हर बार आंखें नम कर (school not crisis) देती है.

    बता दें कि मध्य प्रदेश में कुल सरकारी स्कूलों की संख्या 88 हजार 269 है. वहीं सरकार ने 2024-25 के शिक्षा बजट में 23 हजार 40 करोड़ रुपए का प्रावधान किया था. हालांकि जर्जर स्कूलों की संख्या करीब 7,000 है.

    स्कूल की हालत बदतर

    दरअसल प्रदेश की राजधानी भोपाल से सिर्फ 10 किलोमीटर दूर डोगरा जागीर गांव में स्कूल की हालत बदतर है. अब ये हाल राजधानी के पास है, तो सोचिए दूर-दराज़ के स्कूलों की क्या स्थिति होगी. यहां बच्चों की क्लास अब खुले आसमान के नीचे लगती है क्योंकि स्कूल की छत से पानी टपकता है.

    राज्य के बाकी जिलों की हालत
    • रतलाम के ग्राम शिवपुर के स्कूल में कीचड़ से परेशान बच्चे जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे, लेकिन 2 घंटे इंतज़ार के बाद डीएम नहीं मिले. इतना ही नहीं मीडिया को भी ऑफिस में जाने से रोक दिया गया. इस दौरान छात्रों ने बताया कि बारिश में हम स्कूल नहीं जा पाते. पूरा रास्ता कीचड़ से भर जाता है.
    • वहीं बुरहानपुर के बाकड़ी गांव में स्कूली बच्चे कीचड़ भरे रास्ते में स्कूल जाने को मजबूर हैं. ग्रामीणों का कहना है कि बारिश में बच्चे अगर स्कूल नहीं पहुंच पाते हैं, उनकी पढ़ाई प्रभावित हो जाती है.
    • गुना के संगई गांव में बच्चे टपरे (झोंपड़ी) के नीचे पढ़ाई कर रहे हैं. जबकि फतेहगढ़ के सीएम राइज स्कूल में बारिश का 5 फीट पानी लगा हुआ है. जिसकी वजह से किताबें, यूनिफॉर्म, स्मार्ट (school not crisis) स्क्रीन सब बर्बाद हो रहे हैं.

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