रांची : झारखंड हाईकोर्ट ने रांची के DIG ग्राउंड स्थित रिम्स की जमीन पर अवैध निर्माण के मामले में एसीबी जांच के निर्देश दिए हैं. साल 1964-65 से अधिग्रहित भूमि पर बनी बहुमंजिला (rims land scam) इमारतों को गिराने के बाद फ्लैट खरीदारों के मुआवजे की जिम्मेदारी भ्रष्ट अफसरों और बिल्डरों पर तय करने को कहा है.
झारखंड हाईकोर्ट ने रिम्स की जमीन पर अतिक्रमण के मामले में प्रभावित फ्लैट खरीदारों को उचित मुआवजा देने और यह राशि दोषी अधिकारियों व बिल्डरों से वसूलने का निर्देश दिया है. अदालत ने साफ कहा कि निर्दोष खरीदारों का नुकसान सरकारी कोष से नहीं, बल्कि उन लोगों से भरपाई कराई जाए जिन्होंने सरकारी जमीन को निजी बताकर बेचने का अपराध किया है.
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कोर्ट ने इस पूरे घोटाले की जांच एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) से कराने का आदेश देते हुए यह भी टिप्पणी की कि आवश्यक हो तो आगे चलकर सीबीआई जांच की संभावना खुली रहेगी. अदालत ने संबंधित अफसरों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने और उनकी जिम्मेदारी तय करने को कहा, ताकि भविष्य में सरकारी भूमि की ऐसी अवैध सौदेबाजी दोबारा न हो सके.
rims land scam – हाईकोर्ट को बताया है कि रांची के मोरहाबादी और कोकर मौजा में रिम्स की करीब 9.65 एकड़ जमीन पर अवैध कब्जा किया गया, जिस पर मंदिर, बाजार, कच्चे मकान और बहुमंजिला अपार्टमेंट तक खड़े कर दिए गए. यह वही जमीन है, जो 1964-65 में चिकित्सा संस्थान के विस्तार और सार्वजनिक उपयोग के लिए अधिग्रहित की गई थी, लेकिन बाद में राजस्व रिकॉर्ड, रजिस्ट्रेशन और नगर निगम की मिलीभगत से इसे निजी प्लॉट की तरह बेच दिया गया.

