नई दिल्ली: सिरदर्द हो, कमर दर्द या फिर घुटनों और जोड़ों की तकलीफ—आजकल अधिकांश लोग बिना सोचे-समझे तुरंत आराम पाने के लिए पेन किलर का सेवन कर लेते हैं। समस्या तब गंभीर रूप धारण कर लेती है जब दर्द से राहत पाने के लिए इन गोलियों का इस्तेमाल जरूरत से ज्यादा और बिना चिकित्सीय परामर्श के (repeatedly taking medicine for headache) बार-बार होने लगता है।
repeatedly taking medicine for headache – तात्कालिक रूप से दर्द भले ही गायब हो जाए, लेकिन लंबे समय तक इन दवाओं का अनियंत्रित सेवन किडनी की कार्यप्रणाली को अंदर ही अंदर खोखला कर सकता है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि पेन किलर से किडनी को होने वाला शुरुआती नुकसान ‘साइलेंट किलर’ की तरह बिना किसी स्पष्ट लक्षण के धीरे-धीरे बढ़ता रहता है।
डॉ. झा के अनुसार, नॉन-स्टेरॉयडल एंटी-इंफ्लेमेटरी ड्रग्स श्रेणी की कई पेन किलर्स किडनी में होने वाले जरूरी ब्लड फ्लो (रक्त संचार) को बाधित कर देती हैं। लगातार इस्तेमाल से नेफ्रॉन्स की फिल्टर करने की क्षमता घटने लगती है। शुगर और उच्च रक्तचाप से पीड़ित लोगों की किडनियों पर पहले से ही अतिरिक्त दबाव होता है। ऐसे में पेन किलर का सेवन किडनी फेलियर के खतरे को कई गुना बढ़ा देता है।
डॉक्टर से परामर्श के बाद ही लें दवा
डॉ. झा का कहना है कि कभी-कभार आपात स्थिति में एक गोली लेना अलग बात है, परंतु यदि आपको बार-बार या रोज पेन किलर की जरूरत पड़ रही है, तो दवा से दर्द दबाने के बजाय संबंधित विशेषज्ञ से मिलकर दर्द के मूल कारण (जैसे गठिया, डिस्क, माइग्रेन आदि) का उपचार कराएं।


