रामगढ़: वन क्षेत्र के चपरी-बुमरी स्थित बंद पड़ी खदान में जहरीली गैस और ऑक्सीजन की कमी से चार लोगों की मौत के बाद पूरे इलाके में शोक और आक्रोश है। इस दुखद घटना के बाद झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी रविवार को रामगढ़ पहुंचे। उन्होंने पीड़ित परिवारों से मिलकर सांत्वना दी और घटनास्थल का निरीक्षण कर सीसीएल (CCL) प्रबंधन तथा जिला प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्न खड़े किए।

⚠️ “यह हादसा नहीं, प्रबंधन की लापरवाही है”: बाबूलाल

पीड़ित परिवारों से मिलने के बाद बाबूलाल मरांडी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि यह कोई आकस्मिक घटना नहीं, बल्कि अव्यवस्था का परिणाम है। उन्होंने आरोप लगाया कि एक व्यक्ति को बचाने के चक्कर में अन्य लोग अंदर गए और समय पर रेस्क्यू न मिलने के कारण चारों ने जान गंवा दी। उन्होंने कहा कि गैस रिसाव जैसी घटनाओं में हर सेकंड कीमती होता है, लेकिन सीसीएल की रेस्क्यू टीम बहुत देर से पहुंची।

🛡️ “बंद खदानों की सुरक्षा सुनिश्चित करे सीसीएल”

मरांडी ने मांग की कि सिरका, बुमरी और आसपास के कोयलांचल क्षेत्रों में जितनी भी बंद या परित्यक्त खदानें हैं, उनकी तत्काल पहचान कर उन्हें मजबूती से घेरा जाए। उन्होंने कहा कि खनन कंपनियों का दायित्व केवल कोयला उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि स्थानीय लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने चेतावनी बोर्ड लगाने और सुरक्षा मानकों को सख्ती से लागू करने पर जोर दिया।

🔍 रेस्क्यू में पैसे मांगने का आरोप, निष्पक्ष जांच की मांग

बाबूलाल मरांडी ने बचाव अभियान के दौरान पैसे मांगे जाने की खबरों को बेहद शर्मनाक और अमानवीय बताया। उन्होंने कहा कि प्रशासन का रवैया भी असंवेदनशील रहा है, क्योंकि घायलों को बेहतर इलाज के लिए रांची ले जाने में भी सहयोग नहीं दिया गया। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है और चेतावनी दी है कि जब तक दोषियों की जवाबदेही तय नहीं होती, भाजपा इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाएगी।

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