दिल्ली: मालवीय नगर के ‘फ्लोरिश स्टे होटल’ में हुई भीषण अग्निकांड के मामले में गिरफ्तार कुक केशव सिंह नेगी की गिरफ्तारी को लेकर विरोध की लहर तेज हो गई है। उत्तराखंड लोक मंच और कई सामाजिक संगठनों ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर दिल्ली पुलिस की जांच को पक्षपाती करार दिया है। प्रदर्शनकारियों का स्पष्ट आरोप है कि 65 वर्षीय केशव नेगी को महज एक ‘बलि का बकरा’ बनाकर असली दोषियों—होटल मालिकों, एमडीसी अधिकारियों और लापरवाह पुलिस कर्मियों—को बचाया जा रहा है।

⚖️ ‘बलि का बकरा’ बनाए जाने का आरोप

3 जून को हुई इस दर्दनाक घटना में 23 लोगों की मौत हुई थी, जिनमें विदेशी नागरिक भी शामिल थे। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अग्निकांड का मुख्य कारण फायर सेफ्टी में भारी चूक और नियमों का उल्लंघन है, जिसकी सीधी जिम्मेदारी होटल मैनेजमेंट की है। एक छोटे स्तर के कर्मचारी को इतने गंभीर आपराधिक आरोपों में फंसाना न्यायसंगत नहीं है।

👮 पुलिस के आरोप बनाम हकीकत

पुलिस ने केशव पर पांच गंभीर आपराधिक आरोप लगाए हैं, जिनमें आग लगने पर दरवाजा बंद करके भागने का आरोप शामिल है। उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भी भेजा गया है। हालांकि, नागरिक समाज और कार्यकर्ता इस कदम की कड़ी आलोचना कर रहे हैं। उनका तर्क है कि सुरक्षा मानकों का पालन करना होटल प्रशासन का दायित्व है, जिसे अनदेखा किया गया है।

📣 अगली रणनीति: आंदोलन तेज करने की चेतावनी

उत्तराखंड होटल एसोसिएशन और अन्य समर्थकों ने चेतावनी दी है कि यदि दिल्ली पुलिस ने मामले की निष्पक्ष जांच नहीं की और केशव नेगी को रिहा नहीं किया, तो दिल्ली में एक बड़ी रैली निकाली जाएगी। समर्थक इस मामले में जवाबदेही तय करने और गरीब कर्मचारी को न्याय दिलाने की मांग पर अड़े हुए हैं। फिलहाल यह मामला दिल्ली पुलिस की कार्यप्रणाली और होटल सुरक्षा मानकों पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है।

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