जालंधर : पंजाब विधानसभा चुनावों में करीब छह महीने का समय शेष है और कांग्रेस अब अपने संगठनात्मक ढांचे को दुरुस्त करने में जुट गई है। विपक्षी दलों से मुकाबले से पहले पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने आंतरिक गुटों को एकजुट करने की है। इसी दिशा में पार्टी हाईकमान ने एक तीन सदस्यीय समिति का गठन किया है, जो (congress’s mission Punjab) पंजाब के सियासी हालात और चुनावी तैयारियों की समीक्षा कर रही है।
66 नेताओं के साथ वन-टू-वन चर्चा
पार्टी नेतृत्व ने वरिष्ठ नेताओं अजय माकन, मीनाक्षी नटराजन और भजन लाल जाटव की एक समिति को पंजाब की जिम्मेदारी सौंपी है। इस समिति ने दिल्ली में पंजाब के 66 प्रमुख नेताओं को बुलाकर फीडबैक लेना शुरू कर दिया है। समिति ने 33 नेताओं के साथ व्यक्तिगत (One-to-One) चर्चा कर जमीनी हकीकत, चुनावी तैयारियों और नेतृत्व संबंधी मुद्दों पर राय ली है।
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congress’s mission Punjab – हालांकि पार्टी ने मुख्यमंत्री पद के लिए किसी चेहरे की औपचारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन कई वरिष्ठ नेताओं की सक्रियता ने इस बहस को हवा दी है। अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग, प्रताप सिंह बाजवा, चरणजीत सिंह चन्नी और सुखजिंदर सिंह रंधावा जैसे दिग्गज नेताओं की दावेदारी पार्टी के लिए एक चुनौती और अवसर दोनों है। हाईकमान का लक्ष्य है कि चुनावी रणनीति सामूहिक नेतृत्व पर आधारित हो।
राहुल और खड़गे की भूमिका पर सबकी नजर
कांग्रेस की भावी रणनीति राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे के निर्णयों पर निर्भर करेगी। तीन सदस्यीय समिति अपनी रिपोर्ट सीधे राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे को सौंपेगी। इसके आधार पर ही संगठनात्मक फेरबदल और चुनाव प्रबंधन समितियों का गठन किया जाएगा। साथ ही, राहुल गांधी की प्रस्तावित पंजाब ‘बस यात्रा’ को कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा भरने का माध्यम माना जा रहा है।


