पटना: बिहार की स्वास्थ्य सेवाओं की पोल उस समय खुल गई जब राज्य के स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने PMCH का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान अव्यवस्थाओं को देखकर मंत्री बेहद नाराज हुए और तत्काल प्रभाव से PMCH के प्रिंसिपल डॉ. नरेंद्र प्रताप को उनके पद से हटा दिया। इस कार्रवाई के बाद राज्य में राजनीतिक और प्रशासनिक बयानबाजी तेज हो गई है।

📞 क्या है पूरा मामला?

मिली जानकारी के अनुसार, मंत्री निशांत कुमार रेडियोलॉजी विभाग का उद्घाटन करने के बाद एक बैठक के लिए पहुंचे थे, लेकिन उस समय वहां कोई भी वरिष्ठ अधिकारी मौजूद नहीं था। जब मंत्री ने फोन के जरिए प्रिंसिपल से संपर्क करने का प्रयास किया, तो आरोप है कि प्रिंसिपल ने फोन नहीं उठाया। मंत्री ने इसे घोर लापरवाही मानते हुए सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी थी और अंततः प्रिंसिपल को पदमुक्त कर दिया गया।

🗣️ ‘यह अपमानजनक है, मन करता है आत्महत्या कर लूं’ – डॉ. नरेंद्र प्रताप

अपने बचाव में डॉ. नरेंद्र प्रताप ने कहा कि यह कार्रवाई उनकी गरिमा को ठेस पहुँचाने वाली है। उन्होंने कहा, “मैं खुद को एक सम्मानित व्यक्ति मानता हूं। 2018-2019 में भी मेरे खिलाफ गलत कार्रवाई हुई थी जिसे सुप्रीम कोर्ट ने दुर्भावनापूर्ण (mala fide) करार दिया था।” उन्होंने अपनी व्यथा व्यक्त करते हुए कहा कि इस अपमान के कारण उनके मन में आत्महत्या तक के विचार आ रहे हैं।

🛡️ डिप्टी सीएम ने किया मंत्री का बचाव

इस विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए उप-मुख्यमंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार का पूर्ण समर्थन किया। उन्होंने JD(U) मुख्यालय में कहा कि सरकार अपना काम कर रही है और जो भी कार्रवाई की गई है, वह स्पष्ट रूप से दिख रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भविष्य में जो भी कदम उठाए जाएंगे, वे जांच रिपोर्ट के आधार पर होंगे

Share.
Exit mobile version