दिल्ली से सटे नोएडा औद्योगिक क्षेत्र में मजदूरों का गुस्सा अब एक शहर तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे दिल्ली-एनसीआर में फैला हुआ एक बड़े आंदोलन का रूप ले चुका है. वेतन वृद्धि, महंगाई और श्रम सुविधाओं को लेकर शुरू हुआ यह विरोध अब कई जिलों में असर दिखा रहा है. नोएडा में चल रहे इस आंदोलन की (Noida labor protest) शुरुआत 7 अप्रैल को गुरुग्राम के मानेसर इलाके से हुई थी, जहां मजदूरों ने अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन शुरू किया था.
Noida labor protest – इसके बाद यह विरोध धीरे-धीरे नोएडा और फिर ग्रेटर नोएडा पहुंचा. अब इस आंदोलन का असर गाजियाबाद, बुलंदशहर और हापुड़ तक में भी दिखाई दे रहा है. आज बड़ी संख्या में बुलंदशहर और गाजियाबाद में श्रमिकों ने प्रदर्शन किया और सड़कों को जाम कर दिया. गाजियाबाद में स्थिति इतनी खराब हो गई कि नोएडा-गाजियाबाद बॉर्डर पर कई किलोमीटर लंबा जाम लग गया.
कब उग्र हुआ आंदोलन?
मजदूरों के आंदोलन की स्थिति ने 12 अप्रैल को बड़ा मोड़ लिया. ग्रेटर नोएडा के इकोटेक थर्ड इलाके में प्रदर्शन के दौरान मिंडा कंपनी के पास हालात अचानक बिगड़ गए. इस दौरान पुलिस कार्रवाई में गोली चलने की घटना सामने आई, जिसमें एक महिला मजदूर को गोली लग गई. यह घटना पूरे आंदोलन के लिए टर्निंग प्वाइंट साबित हुई. जैसे ही गोलीकांड की खबर फैली, मजदूरों में भारी आक्रोश फैल गया और आंदोलन ने उग्र रूप ले लिया.
बुलंदशहर और हापुड़ में भी सड़क पर मजदूर
यह आंदोलन किसी एक कंपनी के खिलाफ नहीं, बल्कि कई कंपनियों के मजदूरों का सामूहिक विरोध है. अब इसका असर पूरे एनसीआर में दिखने लगा है. गाजियाबाद, बुलंदशहर और हापुड़ जैसे जिलों में भी मजदूर सक्रिय हो गए हैं, जिससे आने वाले दिनों में आंदोलन और व्यापक होने की आशंका है.
क्या है मजदूरों की मांग?
मजदूरों की प्रमुख मांगों में न्यूनतम वेतन बढ़ाकर 26,000 रुपये प्रति माह करना, ओवरटाइम का भुगतान दोगुनी दर से करना, साप्ताहिक अवकाश सुनिश्चित करना, समय पर वेतन भुगतान, सैलरी स्लिप देना और बोनस को सीधे बैंक खाते में समय पर भेजना शामिल है. उनका कहना है कि महंगाई के इस दौर में मौजूदा वेतन से गुजारा संभव नहीं है.


