उत्तरप्रदेश के प्रयागराज में इस बार कोशिश है कि नमाज (Namaz Not On Road) सड़कों पर न हो। कमेटियों, उलेमाओं और पेश इमामों ने खास हिदायत दी है कि नमाज का इंतजाम इस तरह हो कि जिससे दूसरों को परेशानी का सामना न करना पड़े।अलविदा यानी आखिरी जुमा को लेकर मुस्लिम इलाकों में खासी तैयारी चल रही है। एक तरह से छोटी ईद कहलाने वाले रमजान के आखिरी जुमे पर अलविदा की नमाज अदा होती है। एक तो अजान की आवाज और दूसरे सड़कों पर नमाज अदा करने को लेकर विवाद, इसी में भीषड़ गर्मी। ऐसे में इस बार ज्यादातर मस्जिदों, मदरसों समेत अन्य इबादतगाहों के अंदर ही नमाज के इंतजाम किए जा रहे हैं।
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Namaz Not On Road – गौरतलब है कि अलविदा की नमाज के लिए शहर से लेकर गांवों तक ईद जैसी भीड़ ही उमड़ती है। मस्जिदों की छतों, दूसरी मंजिलों पर सफाई कर टेंट या छावनी का इंतजाम किया जा रहा है। पंखे और कूलर भी मंगाए जा रहे हैं ताकि नमाज और खुतबा सुनने वालों को दिक्कत न हो।
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कई बड़े मदरसों में इस बार अलविदा की नमाज का इंतजाम किया गया है। जो इलाके पूरी तरह मुस्लिम आबादी वाले हैं वहां मस्जिदों के सामने या फिर सड़क पर नमाज हो सकती है। मिलीजुली आबादी वाले इलाकों में कोशिश है कि मस्जिदों के अंदर ही नमाज अदा हो।

