मध्य प्रदेश : प्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक पारा सातवें आसमान पर है। भाजपा द्वारा तीसरी सीट के लिए महेश केवट को उम्मीदवार बनाए जाने के बाद मुकाबला बेहद रोमांचक हो गया है। आज कांग्रेस की मीनाक्षी नटराजन और भाजपा के महेश केवट अपना नामांकन दाखिल करेंगे। इसके बाद अब सबकी नजरें विधानसभा के (political stir increased) चुनावी गणित और विधायकों को एकजुट रखने की रणनीतियों पर टिकी हैं।
विधायकों को तेलंगाना ले जाने की तैयारी?
राज्यसभा चुनाव में अपने विधायकों को तोड़ने से बचाने के लिए कांग्रेस अब ‘बाड़ाबंदी’ की रणनीति पर विचार कर रही है। चर्चा है कि विधायकों को सुरक्षित रखने के लिए तेलंगाना भेजा जा सकता है। चूंकि मीनाक्षी नटराजन तेलंगाना कांग्रेस की प्रभारी भी हैं, इसलिए इस संभावना को राजनीतिक गलियारों में काफी बल मिल रहा है, हालांकि पार्टी की ओर से अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
चुनावी गणित: जीत का आंकड़ा और पेच
राज्यसभा चुनाव में जीत हासिल करने के लिए प्रति उम्मीदवार 58 वोटों की आवश्यकता है। प्रदेश की स्थिति पर नजर डालें:
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भाजपा: 164 सीटें (116 वोट दो सीटों के लिए तय, अतिरिक्त 48 वोट, तीसरी सीट के लिए 10 वोटों की कमी)।
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कांग्रेस: 63 वोट (BAP के समर्थन से 64 तक संभव, जो जीत के लिए पर्याप्त है)।
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समीकरण: भाजपा को तीसरी सीट के लिए अतिरिक्त 10 वोटों की दरकार है। इसी वजह से राजनीतिक विश्लेषक इसे ‘क्रॉस-वोटिंग’ का मुकाबला मान रहे हैं।
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👤 कौन हैं महेश केवट?
भाजपा के उम्मीदवार महेश केवट निवाड़ी जिले के ओरछा के निवासी हैं। वर्तमान में वे मछुआरा कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष के रूप में कार्य कर रहे हैं। भाजपा संगठन में जिला उपाध्यक्ष, जिला सचिव और राष्ट्रीय (political stir increased) कार्यकारिणी सदस्य जैसे अहम पदों पर कार्य करने के बाद, अब वे राज्यसभा की दहलीज पर खड़े हैं। उनकी उम्मीदवारी को भाजपा का एक सोची-समझी रणनीति के तहत लिया गया फैसला माना जा रहा है।


