उज्जैन : धार्मिक नगरी उज्जैन में ऐतिहासिक ‘खड़े हनुमान मंदिर’ को लेकर जारी विवाद के बीच अब पूर्व मुख्यमंत्री व पूर्व केंद्रीय मंत्री उमा भारती का बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को (no compromise on faith) एक औपचारिक पत्र लिखकर विकास कार्यों और जनआस्था के मध्य संतुलन स्थापित करने का महत्वपूर्ण सुझाव दिया है।
no compromise on faith – उमा भारती के अनुसार, विकास योजनाओं को धरातल पर उतारने के लिए धार्मिक स्थलों को हटाना ही एकमात्र अंतिम विकल्प नहीं होना चाहिए, बल्कि आवश्यकता पड़ने पर संबंधित प्रोजेक्ट के मार्ग (रूट) या तकनीकी डिजाइन में बदलाव के विकल्पों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।
आस्था और विकास का सामंजस्य जरूरी
बीजेपी की वरिष्ठ नेता ने इसी मिसाल को सामने रखते हुए कहा कि उज्जैन में भी ऐसा ही व्यवहारिक समाधान निकाला जा सकता है, जिससे सिंहस्थ से जुड़े विकास कार्य भी न रुकें और जनभावनाएं भी आहत न हों। उन्होंने सुझाव दिया कि सदियों पुरानी पावन प्रतिमा को स्थानांतरित करने के बजाय इंजीनियरिंग व वैकल्पिक रास्तों पर विचार करना चाहिए।
170 साल पुराना है मंदिर
यह विख्यात ‘खड़े हनुमान मंदिर’ उज्जैन के कंठाल चौराहा एवं छत्रीचौक मार्ग पर स्थित है, जिसे स्थानीय स्तर पर लगभग 170 वर्ष पुराना बताया जाता है। आगामी सिंहस्थ 2028 के महाआयोजन की तैयारियों के मद्देनजर प्रशासन द्वारा इस मार्ग पर सड़क चौड़ीकरण का कार्य तीव्र गति से किया जा रहा है। सड़क चौड़ीकरण की जद में आने के कारण जेसीबी मशीनों से मंदिर के बाहरी ढांचे को तो हटा दिया गया, किंतु प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार पावन प्रतिमा अपने स्थान से टस से मस नहीं हुई।


